सरकारी स्कूलों में पहले से बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। स्मार्ट बोर्ड भी स्कूलों में पहुंच चुके हैं। पढ़ाई डिजिटल शिक्षा की ओर बढ़ रही है ऐसे में अध्यापकों को भी समय के अनुसार अपडेट होने की आवश्यकता है। अध्यापकों को चाहिए कि वह अपने पढ़ाने के तरीकों को बदलकर सरल करें ताकि विद्यार्थी सेल्फ स्टडी कर सकें। यह कहना है अमर उजाला की ओर से आयोजित मेधावी छात्र सम्मान समारोह में पहुंचे विद्यार्थियों का।
विद्यार्थियों का यह भी कहना है कि अब उन्हें मुगलों का नहीं अपने योद्धाओं का इतिहास पढ़ना है। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड को इसमें बदलाव करना चाहिए। स्कूल में इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ साथ अध्यापकों की भी संख्या बढ़ानी चाहिए ताकि विद्यार्थी को ट्यूशन की आवश्यकता न पड़े।
परीक्षा में नकल रोकना जरूरी
भिवानी से आई यशिका का कहना है कि बोर्ड की परीक्षा में नकल होती है। इसे बंद करना जरूरी है। कुछ विद्यार्थी नकल कर अच्छे अंक ले जाते हैं और मेहनत, लगन से पढ़ने वाले विद्यार्थी उनसे पीछे रह जाते हैं। इससे अलग पाठ्यक्रम में सामान्य ज्ञान को ज्यादा से जोड़ा जाए। स्कूलों में शिक्षा विभाग ने टैबलेट दिए हुए हैं लेकिन विद्यार्थी उसका मनोरंजन के लिए प्रयोग करते हैं। इस पर विभाग को सख्ती करनी चाहिए। इससे अलग हर विद्यार्थी को स्कॉलरशिप देनी चाहिए।
अध्यापक हर सप्ताह ले टेस्ट
पंचकूला निवासी जानवी शर्मा का कहना है कि हरियाणा बोर्ड को चाहिए कि जेईई व नीट की तैयारी करने के लिए संबंधित पाठ्यक्रम को भी जोड़ा जाए ताकि विद्यार्थियों को अलग से कोचिंग न लेनी पड़े। स्कूल में साप्ताहिक व मासिक टेस्ट अध्यापक को भी लेने चाहिए ताकि विद्यार्थियों की शिक्षा के स्तर का पता चल सके व कमजोर विद्यार्थी फाइनल परीक्षा आने से पहले अपनी पूरी तैयारी कर सके।
अध्यापक सरल भाषा में समझाएं
अंबाला की नैन्सी का कहना है कि अध्यापकों को अपने पढ़ाने के तरीके को बदलना होगा। विद्यार्थियों को सरल भाषा में पढ़ाएं और हो सके तो प्रेक्टिकल भी कराएं ताकि विद्यार्थी उस प्रश्न को अच्छे से समझ सकें और उसे ट्यूशन की आवश्यकता ही न पढ़े। सरकारी स्कूल में गरीब व मध्यम परिवार से जुड़े विद्यार्थी पढ़ते हैं जो ट्यूशन नहीं लगा सकते। विद्यार्थियों को भी चाहिए कि जो स्कूल में पढ़ाया गया है वह घर जाकर अवश्य पढ़ें। ऐसा करने से ट्यूशन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
डिजिटल शिक्षा पर जोर दिया जाए
पंचकूला निवासी तनिष्का ने बताया कि नई शिक्षा नीति बहुत अच्छी है। सरकार को डिजिटल शिक्षा पर और अधिक जोर देना चाहिए। स्मार्ट बोर्ड का प्रयोग हर स्कूल में होना चाहिए। अध्यापकों को भी चाहिए कि वह विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से अलग अपने तरीके से समझाएं ताकि विद्यार्थी सेल्फ स्टडी कर सकें और अच्छे अंक प्राप्त कर स्कूल का नाम रोशन कर सकें।
सरकारी स्कूल में सख्त माहौल जरूरी
अंबाला से आए योगेश का कहना है कि नई शिक्षा नीति में विषय बदलना ठीक नहीं है। पहले जैसी स्ट्रीम बनी थी, वही ठीक थी। अब विद्यार्थी विषयों को लेकर भ्रमित हो रहे हैं। सरकार को इतिहास में मुगलों की बजाए अपने देश के महान योद्धाओं के पराक्रम को पढ़ाना चाहिए। वहीं सरकारी स्कूल में भी प्राइवेट स्कूल की तर्ज पर व्यवस्था सख्त होनी चाहिए। सरकारी स्कूल में टीचर कक्षा में कभी आते हैं, कभी नहीं।