नगर निगम की मेयर रेणु बाला गुप्ता ने अपनी सरकारी गाड़ी निगम कार्यालय में खड़ी कर दी है। इतना हा नहीं गाड़ी की चाबी भी आयुक्त के कार्यालय को सौंप दी है। फिलहाल, पिछले पांच दिन से मेयर अपनी निजी गाड़ी का प्रयोग कर रहीं हैं और सरकारी गाड़ी पर धूल जम गई है।
उधर, मेयर द्वारा गाड़ी लौटाने को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। निगम के विश्वस्त सूत्र दावा करते हैं कि एक पेट्रोल पंप द्वारा गाड़ी को तेल नहीं देने के कारण ऐसी नौबत आई है। मामला सीएम दरबार तक पहुंच चुका है।
पांच दिन से मेयर की गाड़ी निगम के कार्यालय में खड़ी है। जांच करने पर पता चला कि मेयर ने निगम कार्यालय के कर्मचारियों के रैवये के चलते गाड़ी खड़ी की है। बताया जाता है कि निगम की गाड़ी को तेल देने के लिए एक पेट्रोल पंप से अनुबंध है, लेकिन पिछले दिनों जब मेयर की गाड़ी पेट्रोल पंप पर गई तो पेट्रोल पंप मालिक ने बकाया नहीं आने की बात कही और तेल देने से इंकार कर दिया।
पेट्रोल पंप का निगम को पिछला बिल करीब दस हजार रुपये देना था। इसके चलते मामला इतना बिगड़ गया कि मेयर ने अपनी सरकारी गाड़ी ही कार्यालय परिसर में खड़ी कर दी। उधर, राजनीतिक लोग इसे विरोध का तरीका मान रहे हैं, हालांकि मेयर इस बारे में किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इंकार करती हैं। निगम की आयुक्त ने मेयर द्वारा कार्यालय परिसर में सरकारी गाड़ी खड़ी करने व चाबी वापस करने की पुष्टि की।
लिमिट है 1500, गाड़ी चलती है ज्यादा
नियमों के अनुसार मेयर की गाड़ी की लिमिट प्रति माह 1500 किलोमीटर है। निगम के कर्मचारियों का कहना है कि लेकिन मेयर की गाड़ी 1500 किलोमीटर से ज्यादा चलती है। इसको लेकर भी विवाद चल रहा है। बताया जाता है कि निगम की ओर से मेयर की गाड़ी किलोमीटर लिमिट बढ़ाने को लेकर भी सरकार को पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी तक लिमिट नहीं बढ़ी है। कर्मचारियों का कहना है कि लिमिट कम होने के कारण भी मेयर नाराज हैं।
आयुक्त और मेयर में टकराव की अटकलें
निगम सूत्रों का दावा है कि कुछ चीजों को लेकर निगम की मेयर और आयुक्त के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। कई बार आपस में टकराव की अटकलें लगती रही हैं, लेकिन कभी विवाद सामने नहीं आया। मेयर द्वारा सरकारी गाड़ी खड़ी करने को लेकर भी इसी तरह की बातें सामने आ रही हैं। बताया जाता है कि निगम के एक क्लर्क द्वारा पेट्रोल पंप का भुगतान किया जाता है, लेकिन किन्हीं कारणों से इस बार भुगतान देरी से हुआ तो संचालक ने तेल देने से इंकार कर दिया और मामला बिगड़ गया।
न कोई शिकवा न शिकायत : मेयर
इस बारे में मेयर रेणुबाला गुप्ता का कहना है कि वे इस मामले में कोई भी टिप्पणी नहीं करना चाहती हैं। न तो उनका कोई शिकवा है और न ही शिकायत। बार-बार पूछे जाने पर भी उन्होंने सरकारी गाड़ी कार्यालय में खड़ी कराने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। आखिर में इतना ही नहीं कहा कि घर में जगह नहीं थी, इसलिए यहां खड़ी कर दी। कोई इश्यू नहीं है।
कोई मनमुटाव नहीं : आयुक्त
इस बारे में निगम की निगम की आयुक्त सुमेधा कटारिया का कहना है कि कोई ऐसा इश्यू नहीं है। हां, मेयर मैडम ने सरकारी गाड़ी जरूर कार्यालय परिसर में खड़ी की है और इसकी चाबी भी कार्यालय को सौंपी है। इसके पीछे क्या कारण है, मैं इस बारे में कुछ नहीं बता सकती, इस बारे में तो मेयर ही बता सकती हैं। हमने पेट्रोल पंप संचालक की बकाया पेमेंट कर दी है। हमारा किसी से कोई मनमुटाव नहीं है और हम मिलकर स्मार्ट सिटी के लिए काम कर रहे हैं।