बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का भाषण यूपी
मॉडल के इर्दगिर्द घूमता रहा। चुनावी रैली होने के बावजूद मायावती किसी भी
मुद्दे पर आक्रामक नजर नहीं आईं। किसी व्यक्ति विशेष के बजाय कांग्रेस व
भाजपा सरकाराें पर उन्हाेंने निशाना जरूर लगाया मगर उसमें भी तेवर नहीं
दिखे।
उनके अधिकांश भाषण में हरियाणा में अपनी पार्टी यानी की बसपा की
सरकार बनाने पर जोर देने पर रहा। करनाल के सेक्टर-12 के मैदान में रविवार
को लगातार दूसरे दिन बडे़ नेता की रैली थी। शनिवार को जहां प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने आक्रामक शैली में भाषण देकर कांग्रेस समेत अन्य दलाें पर
हमला बोला था, वहीं रविवार की बसपा की रैली में मायावती कहीं पर भी आक्रामक
नजर नहीं आई।
करीब 38 मिनट तक लिखा हुआ भाषण देने के दौरान अधिकांश समय
मायावती शांत सी नजर आई। एकाध मौके को छोड़ दिया जाए तो शुरू से लेकर अंत
तक उन्हाेंने लगभग एक ही लय में भाषण पूरा कर दिया।
मायावती रैली में
मौजूद लोगों को अपने चार बार के कार्यकाल में उत्तरप्रदेश में गरीब व कमजोर
लोगों के लिए कराए गए कार्यों का ब्योरा देते हुए सत्ता में आने पर
हरियाणा में भी उसी पैटर्न को लागू करने की कहतीं रहीं। चाहे वह विकास का
क्षेत्र हो या चाहे सामाजिक सुरक्षा का।
उन्हाेंने बताया कि अपनी कार्यशैली
के बूते उत्तरप्रदेश में कभी सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए। गांवाें व शहराें
के लिए अनेक योजनाएं लागू कर उनका समान रूप से विकास कराया गया।
उत्तरप्रदेश के गरीब व कमजोर वर्ग के लोगाें के जीवन स्तर को ऊपर उठाने का
काम किया गया। भूमिहीन लोगों को खेती के लिए तीन-तीन एकड़ जमीन पर पट्टे पर
दी गई। उन्हाेंने बताया कि कैसे हरियाणा सरकार की भांति बेरोजगारों को
बेरोजगारी भत्ता देकर उन्हें आलसी बनाने के बजाय सरकार व गैर सरकारी
संस्थानाें में स्थायी रोजगार दिया गया।
भाषण के दौरान उन्हाेंने कांग्रेस व
भाजपा के कार्यकाल में गरीब व कमजोर तबके के लिए पर्याप्त योजनाएं बनाए
जाने और बाकी बनाई योजनाओं को प्राथमिकता से लागू न करने की बात भी साधारण
लहजे में कही। यहां पर भी मायावती यूपी में अपने चार कार्यकाल में गरीब व
कमजोर वर्ग के लिए बनाई योजनाआें को सख्ती से लागू करने की बात कहना नहीं
भूलीं। अंत में कहा कि अगर हरियाणा में सत्ता में आए तो उत्तरप्रदेश पैटर्न
पर काम किया जाएगा।