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शहीद की मां बोली, अगले जन्म भी मुझे ‘राम-मेहर’ देना

Thu, 27 Apr 2017 12:33 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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विलाप करती शहीद की पत्‍नी और परिजन। - फोटो : अमर उजाला
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शहीद राममेहर का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह जब उनके पैतृक गांव खेड़ीमान सिंह पहुंचा तो परिजनों के साथ पूरा गांव रो पड़ा। हजारों की तादाद में पहुंचे लोगों ने शहीद राममेहर अमर रहे का नारा लगाते हुए शहीद को अंतिम विदाई दी। वहीं, शहीद की मां मामकौर अपने बेटे का शव देखकर झोली फैलाकर बोली-हे राम! अगली बार भी मुझ पर मेहर (यही बेटा) देना। बेटे रोहित ने अपने पिता को सैल्यूट कर मुखाग्नि दी और राजकीय सम्मान के साथ शहीद को अंतिम विदाई दी गई। सीआरपीएफ की टुकड़ी ने सलामी भी दी।
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शहीद राममेहर का पार्थिव शरीर मंगलवार देर रात करीब एक बजे करनाल पहुंचा। शव को रातभर कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के शवगृह में रखा गया। यहां से सुबह सात बजे पार्थिव शरीर को सीआरपीएफ के ट्रक में सम्मान के साथ गांव खेड़ीमान सिंह ले जाया गया। जहां 15 मिनट तक पार्थिव शरीर को घर के सामने अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। शहीद के चेहरे से कफन हटाया गया तो शव देख परिजनों के साथ वहां मौजूद सैकड़ों लोग बिलख पड़े। हर कोई शहीद राममेहर की बहादुरी को सलाम कर रहा था। अंतिम दर्शन के बाद शव यात्रा निकाली गई। इसमें सैकड़ों महिलाओं के साथ हजारों लोगों का हुजूम उमड़ा।

गमगीन आंखों के साथ लोगों ने अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। श्मशान घाट पहुंचने पर शहीद के बेटे रोहित ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ अपने पिता को मुखाग्नि दी। पिता का जलता पार्थिव शरीर देखकर रोहित फफककर रो पड़ा। जिसे परिजनों ने संभाल कर बैठाया। शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री कर्णदेव कंबोज, सीपीएस बख्शीश सिंह, हैफेड के चेयरमैन हरविंद्र कल्याण के साथ सीआरपीएफ के आईजी भानू प्रसाद, डीसी मंदीप सिंह बराड़, एसपी जेएस रंधावा के साथ पूरा जिला प्रशासन मौजूद रहा।
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पत्नी बोली, हमें भी जाना पति के साथ
शहीद का शव जब सुबह घर पहुंचा तो हर तरफ चीख-पुकार मच गई। परिजन एक दूसरे से चिपक कर रोने लगे। वे उन्हें सांत्वना देते और राममेहर की शहादत की बात कह खुश होने को कहते, लेकिन अपने वीर सपूत को खोने का दर्द हर दिल में था। वे अपने आंखों से बहते आंसू को नहीं रोक पा रहे थे। वहीं जब शहीद के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया तो शहीद की पत्नी अपने पति का चेहरा देख गश खाकर गिरने लगी। वो अपने पति का चेहरा देखकर बोली- मुझे भी इनके साथ ही जाना है। मैं अब जिंदा नहीं रहना चाहती। लोग बड़ी मुश्किल से उन्हें संभालकर वहां से दूर किया।

भारत माता की जय और शहीद राममेहर अमर रहे के नारों से गूंज उठा गांव
शहीद का पार्थिव शरीर जब अंतिम विदाई के लिए श्मशान घाट पहुंचा तो पूरा श्मशानघाट भारत माता की जय और शहीद राममेहर अमर रहे के नारे से गूंज उठा। लोगों ने कहा कि राममेहर की शहादत को करनाल के साथ पूरा देश याद रखेगा। देश की सुरक्षा करते हुए शहीद होकर राममेहर ने हमारे गांव का मान बढ़ाया है। वहीं शहीद के भाई ने कहा कि भगवान ऐसा भाई सभी को दें। जब तक वे जिंदा थे, परिवार के लिए बहुत त्याग किया। शहीद होने के बाद पूरे गांव का नाम रोशन कर गए।

मुखाग्नि के बाद पहुंचे एसपी
शहीद के अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए जहां हजारों ग्रामीण के साथ पूरा प्रशासनिक अमला सुबह से ही शहीद के घर पर डेरा जमाए हुए था, वहीं एसपी जेएस रंधावा शहीद के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दिए जाने के बाद श्मशान घाट पहुंचे। शहीद के घर पर सबसे पहले पहुंचने वालों में मंत्री कर्णदेव कंबोज रहे। वे सुबह 7.30 पर ही शहीद के घर पहुंच गए। जिसके बाद डीसी मंदीप सिंह बराड़ व अन्य प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। करीब डेढ़ घंटे शहीद को मुखाग्नि देने की तैयारी में लग गया, लेकिन इस दौरान भी एसपी वहां नहीं पहुंच पाए। सुबह 8.50 पर जब शहीद को अग्रीमुखी दी गई, तब एसपी जेएस रंधावा लगभग दौड़ते हुए श्मशान घाट पहुंचे।
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