कर्ण पार्क में धरना दे रहे दलितों को पुलिस प्रशासन द्वारा शहर से बाहर निकालने का प्लान उल्टा पड़ गया। रात को बसों में भर कर पुलिस दलित समुदाय के लोगों को अंबाला छोड़ आई, लेकिन देर रात तक दलित समाज के लोग दोबारा से पार्क में डट गए। अल सुबह तीन बजे तक पुलिस समुदाय के लोगों को पार्क से हटाने की कोशिश करती रही, लेकिन बात नहीं बनी।
बुधवार दोपहर तीन बजे सिविल लाइन थाना प्रभारी मोहन लाल व अन्य पुलिस अधिकारियों द्वारा समझाने और केस की जांच क्राइम ब्रांच से कराने को लेकर संतुष्टि होने के बाद ही दलितों ने पार्क खाली कर दिया। इससे पहले, रात से ही दलित समुदाय के लोग पार्क में जुटना शुरू हो गए थे, वहीं सुबह सैकड़ों की संख्या में पार्क में लोग एकजुट हो गए। दोपहर तक सभी सदस्य प्रशासन व सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। इस प्रदर्शन में अब अंबाला, करनाल के दलितों के साथ कैथल, पानीपत, कुरुक्षेत्र, सोनीपत के दलित भी शामिल हो गए हैं।
बता दें कि पुलिस ने दो-तीन घंटे तक दलितों को बस में बैठाकर आसपास घुमाने के बाद नीलोखेड़ी में छोड़ दिया। जिससे आक्रोशित दलितों ने रात करीब 10 बजे नीलोखेड़ी थाने का घेराव कर लिया। दलितों का कहना था कि पुलिस हमें जहां से लेकर आई है, वहीं छोड़े। घटना की जानकारी मिलने के बाद रात में ही एसपी जेएस रंधावा भी नीलोखेड़ी पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को मनाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं मानें।
मजबूरन पुलिस ने फिर से दलितों को बस में बैठाकर कर्ण पार्क में भेज दिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद दलित फिर से एकत्रित होने लगे। दोपहर तीन बजे सिविल लाइन थाना प्रभारी मोहन लाल, सदर थाना प्रभारी ललित कुमार ने धरना दे रहे लोगों को अपडेट दी। दोनों अधिकारियों ने बताया कि उनके केस की जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर हो गई है। इसके साथ ही कमेटी के सदस्यों की क्राइम ब्रांच के अधिकारियों से बात भी कराई गई, तब जाकर प्रदर्शनकारियों ने पार्क खाली किया।