सरकार स्कूलों में बच्चों को बेहतर सुविधा देने के दावे कर रही है, लेकिन यमुना क्षेत्र के गांव पीर बडौली के राजकीय प्राथमिक स्कूल में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। इससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। स्कूल में बच्चों को पीने के पानी की समस्या के साथ-साथ स्कूल की चारदीवारी टूटी हुई है। स्कूल में वाटर कूलर लगाने की जगह न होने से उसे शौचालय में लगा दिया। इसके अलावा स्कूल में और भी कई समस्याएं हैं। इनके समाधान के लिए उच्च अधिकारियों को स्कूल प्रधानाचार्य कई बार लिख चुके है, लेकिन समस्या का हल नहीं हुआ। इससे ग्रामीणों में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के प्रति गहरा गुस्सा पनप रहा है। ग्रामीणों ने सरकार व विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि स्कूल में सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाए।
स्कूल में सबमर्सीबल लगभग डेढ़ साल से बंद पड़ा है, लेकिन स्कूल प्रबंधकों ने इस ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई। बच्चों को प्यास बुझाने के लिए घर से पानी की बोतलें भर कर लानी पड़ती है या फिर पास बने मंदिर में जनस्वास्थ्य विभाग की टोंटी का सहारा लेना पड़ता है। अगर जनस्वास्थ्य विभाग की टोंटी नहीं आती तो बच्चों को प्यासे ही पढ़ना पड़ता है। स्कूल में सफाई व्यवस्था का भी बुरा हाल है। चारों तरफ घास ही घास खड़ी है। स्कूल की चारदीवारी टूटी हुई है। जिस कारण लावारिस पशु स्कूल में घूमते रहते है, जोकि बच्चों की पढ़ाई में बाधा बन रहे है। कई बार लावारिस पशु बच्चों के लिए खतरे का कारण भी बन जाते है। स्कूल के कमरों के दरवाजे और खिड़कियां टूटी पड़ी है।
क्या कहते है ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि पीर बड़ौली के प्राइमरी स्कूल में करीब पौने तीन सौ बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में वाटर कूलर भी लगवा रखा है, लेकिन पानी की व्यवस्था न होने से वाटर कूलर भी सफेद हाथी बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है स्कूल की समस्याओं के लिए कई बार मुख्याध्यापक के पास गए, लेकिन उनका रटा रटाया जवाब है कि समस्याओं के लिए उच्च अधिकारियों से अवगत करा चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में पीने के पानी की समस्या के साथ-साथ अन्य कई समस्याएं हैं।
शौचालय में लगा है वाटर कूलर
मजेदार पहलू है कि स्कूल में वाटर कूलर लगाने की जगह न होने के कारण प्रबंधकों ने शौचालय के अंदर वाटर कूलर लगाया हुआ है। जिसमें भी पब्लिक हेल्थ ट्यूबवेल की लाइन से पानी भरकर काम चलाते है, लेकिन शौचालय में वाटर कूलर लगने से पानी पीने का मन नहीं करता है।
क्या बोले सरपंच
गांव के सरपंच अशोक कुमार ने बताया कि गांव की पंचायत के पास कोई बजट नहीं है। जिला उपायुक्त ने गांव में समर्सीबल लगाने से मना किया हुआ है। इसलिए स्कूल में पीने के पानी के साथ-साथ स्कूल की चारदीवारी टूटी हुई है। बिजली की व्यवस्था नहीं है। स्कूल में भी बजट न होने से और भी कई समस्याएं पैदा हो गई हैं। इससे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं हेडमास्टर
स्कूल के हेडमास्टर रविंद्र सिंह ने बताया कि स्कूल का समर्सीबल करीब डेढ़ साल से खराब पड़ा है। इससे पेयजल समस्या है। बच्चों के पीने के पानी के लिए जुगाड़ करके कई बार पानी की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने कहा कि स्कूल में पेयजल समस्या के साथ और भी समस्याएं हैं। जिसके बारे में अधिकारियों से अवगत करा चुके है, लेकिन समस्या का हल नहीं हुआ है।
क्या कहते हैं खंड शिक्षा अधिकारी
खंड शिक्षा अधिकारी परमजीत चहल ने बताया कि गांव पीर बड़ौली के प्राइमरी स्कूल की शिकायत मिली थी। मंगलवार को मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया। स्कूल में बिजली, पानी, सफाई सहित कई समस्याएं मिली हैं। स्कूल की समस्याओं का एस्टीमेट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है।