संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। भौम पुष्य योग में मकर संक्रांति 14 जनवरी मंगलवार को मनाई जाएगी। ये योग लगभग 19 साल के बाद बन रहा है। श्री कर्णेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी षष्ठी वल्लब के बताया कि सुबह आठ बजकर 55 मिनट में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। उन्होंने बताया कि प्रयागराज में इसी समय महाकुंभ का आरंभ प्रथम शाही स्नान से होगा। यह संक्रांति मेष, वृष, कर्क, तुला, बृश्चिक, धनु, मकर और कुंभ राशि वालों को शुभ देगी पर शेष राशि वालों को दौड़ भाग करने वाली रहेगी। मकर संक्रांति को स्नान और दान हवन करने से विशेष लाभ होता है। इस दिन तिलों से हवन करना, तिलों का दान, खिचड़ी का दान, देसी घी का दान, कंबल का दान, गर्म वस्त्नों का दान करना लाभकारी माना जाता है।
पंडित षष्ठी वल्लब के अनुसार मकर संक्रांति के सबसे पहले पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग है। इस योग में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, इसलिए सनातन धर्म में पुनर्वसु नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है। इस योग का समापन सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर होगा। इसके बाद पुष्य नक्षत्र का संयोग है। पंडित के अनुसार वर्षों बाद मकर संक्रांति पर पुष्य नक्षत्र का संयोग है।
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