महामारी से लड़ना, सारा दिन अकेले कमरे में कैद होकर रहना, न किसी से मिलना न बातें करना। एक बार लगा कि जिंदगी खत्म होने वाली है, लेकिन कल्पना चावला मेडिकल कालेज के डाक्टरों ने हौसला दिया। इसी के दम पर हमने कोरोना से जंग जीती है। हम तो जिले के सभी लोगों से अपील करेंगे कि वे अपने परिवार के साथ घर पर रहें और सुरक्षित रहें। यह कहना है कोरोना से जंग जीतने वाले गांव रसीन के किसान के बेटे रविंद्र और मेडिकल कालेज की स्टाफ नर्स मीनू का। दोनों की फाइनल रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद शनिवार दोपहर को छुट्टी दे दी गई। कालेज के स्टाफ ने दोनों का तालियां बजाकर स्वागत किया और कामना की कि वे स्वस्थ रहें। गौरतलब है कि नर्स मीनू एक सप्ताह से कालेज में भर्ती थी और रविंद्र तीन अप्रैल से। दोनों की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद अब करनाल जिले में फिलहाल कोरोना का कोई केस नहीं रह गया है। कोरोना पाजिटिव तीन लोग पहले ही ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं।
डरें नहीं, कोरोना से लड़ें, जीत होगी : मीनू
अमर उजाला से बातचीत में नर्स मीनू ने कहा कि कोरोना से बचने का सबसे अच्छा तरीका है, घर पर रहना। क्योंकि मैं मेडिकल कालेज की नर्स हूं, तो हमारा धर्म है मरीजों की सेवा करना। मैं कोरोना संक्रमित मरीज की देखरेख के चलते संक्रमित हुई, लेकिन आप इससे बच सकते हैं। अब मैं दावे से कह सकती हूं कि कोरोना से डरने की नहीं लड़ने की जरूरत है। व्यक्ति का इम्यूनिटी सिस्टम ठीक हो और जीने का जज्बा हो तो कोरोना को हराया जा सकता है। हां, इस जीत की जंग में मेडिकल कालेज के डाक्टरों और स्टाफ का अहम रोल रहा। वे लगातार हमें मोटिवेट करते रहे और काफी अच्छे तरीके से देखभाल की। आइसोलेशन वार्ड के सभी डाक्टरों और स्टाफ का शुक्रिया करने के साथ मीनू ने कालेज प्रबंधन और जिला प्रशासन का भी धन्यवाद किया।
मुझे मौत के मुंह से खींच लाए डाक्टर : रविंद्र
गांव रसीन के रविंद्र का कहना है कि कई बार उसे लगा कि अब जिंदगी खत्म होने वाली है। क्योंकि वह तीन अप्रैल से दाखिल था, उसके बाद दाखिल होने वाले कोरोना संक्रमित ठीक होकर चले गए, लेकिन बार बार मेरी रिपोर्ट पाजिटिव आ रही थी, इससे मेरी घबराहट बढ़ रही थी। इस पर मेडिकल कालेज के स्टाफ ने हिम्मत बढ़ाई और कहा कि हौसला रखो तुम भी कोरोना को हरा सकते हो। डा. अभिनव डागर, डा. निखिल गोविल, डा. प्रिया समेत तमाम नर्स और अन्य स्टाफ का धन्यवाद, जिन्होंने मुझे कोरोना के चुंगल से छुड़वाया। ये डाक्टरों की कड़ी मेहनत ही थी कि वे मुझे मौत के मुंह से बाहर निकाल लाए।