संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। रसोई गैस सिलिंडर की आपूर्ति में आ रही कमी ने घरेलू महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है। समय पर सिलिंडर नहीं मिलने के कारण घरों की रसोई व्यवस्था भी कुछ बदली है। कुछ महिलाओं ने सिलिंडर खत्म न हो जाए, इसके लिए मिट्टी के चूल्हे तैयार किए हैं। खासकर ग्रामीण महिलाओं ने लकड़ी जलाकर खाना पकाना शुरू कर दिया है। इसमें भी व्यवस्था यह बनाई है कि दिन में दो बार में ही तीन समय की सब्जी मिट्टी के चूल्हे पर तैयार की जाती है, जबकि रोटियां बनाने में एलपीजी सिलिंडर का इस्तेमाल कर रही हैं।
घर की रसोई पूरी तरह से महिलाओं के हाथों में होती हैं ऐसे में उनकी चिंता बढ़ना सामान्य है। सिलिंडर की समय पर बुकिंग न होने से लेकर भविष्य में सिलिंडर की कटौती को लेकर खाना बनाने में परेशानी अभी से होने लगी है। ग्रामीण महिलाओं से लेकर शहर की महिलाएं भी चूल्हों व इंडक्शन का उपयोग करने लगी हैं। गैस सिलिंडर की अनियमित आपूर्ति का असर सबसे अधिक घरों की रसोई पर दिखाई दे रहा है।
-एक समय मिट्टी के चूल्हे पर बना रहीं खाना
राजमनी का कहना है कि सिलिंडर खत्म होने का डर बना रहता है। पहले जहां गैस खत्म होने पर तुरंत नया सिलिंडर मिल जाता था, वहीं अब कई बार बुकिंग के बाद भी इंतजार करना पड़ता है। एक समय गैस पर तो वहीं शाम के समय मिट्टी के चूल्हे पर खाना बना रही हूं।
-जरूरत पड़ने पर इंडक्शन का उपयोग
कुसुम ने बताया कि पहले से एक सिलिंडर भरवा कर रख दिया है लेकिन डर है कि भविष्य में दिक्कत होगी, इसके लिए सिलिंडर का उपयोग न कर इंडक्शन का उपयोग शुरू किया है। कोशिश है कि खाना कम गैस में जल्दी तैयार हो जाए और जरूरत पड़ने पर इंडक्शन का इस्तेमाल किया जा सके।
- बुकिंग न होने पर बदल दिया चूल्हा
सुनीता देवी ने बताया कि उनके घर में हर महीने दो सिलिंडर तक इस्तेमाल हो जाते हैं, लेकिन इस समय एक सिलिंडर की बुकिंग कराने में भी काफी परेशानी हो रही है। पहले से चल रहे सिलिंडर के खत्म होने का डर है इसलिए अब चूल्हे पर खाना बना रही हैं। गैस तो है लेकिन कम इस्तेमाल की जा रही है।
-विकल्प में बनाया मिट्टी का चूल्हा
रीना ने बताया कि गैस सिलिंडर की कमी के कारण रसोई का पूरा सिस्टम बदलना पड़ा है। अब गैस को बचाकर इस्तेमाल किया जा रहा है जिसमें इंडक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं अब बिजली भी काफी बार चली जाती है जिसके लिए विकल्प में दो दिन पहले ही चूल्हा बनाया है।