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Karnal News: परिजनों से छिपकर सीखा हुनर, बना जीविका का सहारा

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- स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
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संवाद न्यूज एजेंसी

करनाल। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अब हुनर के दम पर आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ा रही हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कई महिलाएं ब्यूटी पार्लर का काम कर रही हैं, साथ ही अन्य युवतियों को भी प्रशिक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाने का काम कर रही हैं। कुछ ऐसी महिलाएं हैं, जिन्हें बचपन से मेकअप में रुचि थी लेकिन परिवार वालों को पसंद नहीं थी इसलिए पिता से छिपकर काम सीखा लेकिन वर्तमान में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।





ब्यूटी पार्लर का दे रहीं प्रशिक्षण

चिड़ाव की कमलेश कुमारी 2014 में समूह से जुड़कर सैलून चला रही हैं। उन्होंने बताया कि जन कल्याण समिति से जुड़कर आत्मविश्वास बढ़ा जिसके बाद किराए पर दुकान लेकर छोटे स्तर पर काम शुरू किया। शुरुआत में परिवार वालों की तरफ से मना कर दिया गया था जिसके बाद पति और सास-ससुर को काम करने के लिए राजी किया। घर में कई लड़कियों को प्रशिक्षण दिया। वर्तमान में स्वयं का बड़ा सैलून है जिसमें 15 से 20 को नि:शुल्क काम सिख रही हूं, वहीं गांव-गांव जाकर समूह की ओर से अब तक लगभग 300 युवतियों को ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण दे चुकी हूं।
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खुद का खोला सैलून

इंद्री की लक्ष्मी ने बताया कि वह स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 10 साल से पार्लर का काम कर रही हैं। बचपन से मेकअप करने व दूसरों को सजाने का शौक था लेकिन परिवार वाले इस काम को सही नहीं मानते थे। स्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद पिता से छिपकर ब्यूटी पार्लर का कोर्स सीखने जाती थीं जिसमें मां ने साथ दिया। शादी के बाद समूह से जुड़कर प्रशिक्षण लिया जिसके बाद स्वयं का सैलून शुरू किया। वहीं, कोविड के समय पूरा देश आर्थिक संकट से जूझ रहा था जिसके बाद काम धीमा हो गया था। लक्ष्मी का कहना है कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आए, आत्मविश्वास को कमजोर नहीं होने देना चाहिए।
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