करनाल में हरियाणा वेलफेयर सोसाइटी की ओर से चलाया जा रहा हरियाणा वाणी एवं श्रवण जन निशक्त केंद्र शहर के दानियाें के रहनुमाई पर चल रहा है।
यदि दानी सज्जन सहयोग नहीं करें तो इस केंद्र में रहने वाले विद्यार्थियों को भूखा मरना पड़ जाएगा। प्रदेश के राज्यपाल इस केंद्र की गवर्निंग बॉडी के प्रधान व मुख्यमंत्री उपप्रधान हैं लेकिन प्रदेश सरकार मानती है कि केवल 360 रुपये प्रतिमाह में एक बच्चे का गुजारा आसानी से हो सकता है।
केंद्र में रहकर पढ़ने वाले 52 मूक बधिर बच्चों के लिए प्रदेश सरकार मात्र 20 हजार 200 रुपये की आर्थिक सहायता सालाना दे रही है। यह सहायता भी वर्ष के केवल 10 महीने दी जाती है। वर्ष में होने वाली दो महीने की छुट्टियों के दौरान दो महीने की आर्थिक सहायता सरकार की ओर से काट ली जाती है।
शाखा ग्राउंड में हरियाणा वेलफेयर सोसाइटी की ओर से चलाया जा रहा हरियाणा वाणी एवं श्रवण जन निशक्त केंद्र में आठवीं कक्षा तक के बच्चे पढ़ाई करते हैं। 24 छात्राओं व 28 छात्रों से चल रहा यह स्कूल दानी सज्जनों की रहनुमाई पर ही चल रहा है।
वर्ष 2000 में प्रदेश सरकार द्वारा माता प्रकाश कौर संस्था को शाखा ग्राउंड की करीब दो एकड़ जगह दी गई थी। वर्ष 2001 में सरकार की ओर से इसे पूर्ण रूप से मूक बधिर स्कूल व छात्रावास बनाया गया लेकिन इसमें रहने वाले विद्यार्थियों को मात्र 400 रुपये की आर्थिक सहायता की जाती है। उस राशि में से भी 10 प्रतिशत राशि केंद्र का मुख्यालय अपने पास रख लेता है।
इसी प्रकार केंद्र में एक छात्र को केवल 360 रुपये ही आर्थिक सहायता मिल पाती है। यदि महीने का हिसाब लगाया जाए तो प्रत्येक बच्चों को प्रतिदिन 12 रुपये मिलते है, जिसमें केंद्र की ओर से बच्चों को तीन समय का भोजन, दूध व चाय देने का प्रावधान है।
एक बच्चे की डाइट में 400 ग्राम दूध अनिवार्य है, जहां दूध की कीमत 40 रुपये प्रति लीटर है, वहां एक बच्चे को प्रतिदिन 16 रुपये का दूध चाहिए। दिनभर की डाइट के लिए प्रत्येक बच्चे को आर्थिक सहायता के रूप में मात्र 12 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।
यदि शहर के दानी सज्जन केंद्र में पढ़ने वाले बच्चों का सहयोग नहीं करें तो केंद्र में रहने वाले विद्यार्थियों को भूखा रहने के लिए विवश होना पडे़गा। केंद्र के सहायक निदेशक कंवर सेन ने बताया कि प्रदेश के छह जिलों में कल्याण समिति बनाई गई है।
इसमें गुड़गांव, हिसार, करनाल, सोनीपत, सिरसा व रायपुररानी के केंद्र शामिल हैं। करनाल केंद्र में 93 छात्र हैं, जिनमें 41 छात्र दैनिक स्कूल में आने वाले हैं, जबकि 52 यहीं रहते हैं, जिनके लिए प्रदेश सरकार की ओर से 20200 रुपये सहायता राशि दी जाती है।
400 रुपये प्रति महीना एक छात्रा वासी छात्र को आर्थिक सहायता दी जाती है, जिसमें से 10 प्रतिशत राशि समिति का मुख्यालय अपने पास रख लेता है। 360 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से आर्थिक सहायता दी जाती है, जोकि काफी कम है, केंद्र को चलाने के लिए शहर के लोगों से सहयोग लिया जाता है।
कैंसर पीड़ित हर्ष को मदद की दरकार
करनाल में ब्लड कैंसर से पीड़ित अर्जुन गेट के कुम्हारा मोहल्ला में रहने वाले पांच वर्षीय हर्ष शर्मा के परिजनों ने पीड़ित के उपचार के लिए समाज के लोगों से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है।
हर्ष के पिता नरेश कुमार व माता सीमा ने बताया कि पिछले छह महीने से हर्ष रक्त कैंसर से पीड़ित है। हर्ष का दिल्ली के ऑल इंडिया अस्पताल में उपचार चल रहा है। अब तक हर्ष की पांच कीमोथैरेपी हो चुकी है लेकिन अभी उसे काफी समय अस्पताल में रहना होगा।
हर्ष के उपचार के लिए लाखाें रुपये खर्च आने की संभावना है। हर्ष के परिजनों का समाज के लोगों से काफी उम्मीद है कि उनके मासूम बच्चे के उपचार की सहायता के लिए दानी सज्जन सामने आएंगे। हर्ष के माता-पिता ने बताया कि अप्रैल में बुखार के दौरान हर्ष को खून की कमी हुई थी।
शरीर मेें दर्द होने के कारण हर्ष को पीजीआई चंडीगढ़ दाखिल कराया गया। वहां उपचार के दौरान हर्ष को रक्त कैंसर की पुष्टि हुई थी तभी से हर्ष का दिल्ली के ऑल इंडिया अस्पताल में उपचार जारी है।
हर्ष के शरीर की हड्डियां इतनी कमजोर हो गई थी कि उसकी टांगों ने काम करना बंद कर दिया था लेकिन अब पांच कीमोथेरेपी होने के बाद हर्ष अपनी टांगों पर खड़ा होकर चलने लगा है। हर्ष के परिजनों को उम्मीद है कि समाज के सहयोगी लोग उन्हें निराश नहीं करेंगे।