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नौकरी के नाम पर लाखों रुपये ठगे

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सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर ठगी करने वाले एक गैंग के पांच सदस्यों को पुलिस ने काबू किया है। आरोपियों को कोर्ट में पेश कर चार दिन के रिमांड पर लिया गया है। इनमें एक आरोपी बिजली निगम का कर्मचारी है। पुलिस के अनुसार मधुबन थाने में अशोक विहार निवासी सचिन ने शिकायत दी थी कि उसकी बहन मोनिका नौकरी की तलाश कर रही थी। उसकी मौसी के लड़के शशिपाल के दोस्त संजीव के माध्यम से मोनिका की सरकारी नौकरी लगवाने की बात हुई। जब वह संजय के पास गई तो बताया कि उसका एक दोस्त निदेशक का पीए है।
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फिर वह मोनिका को कथित पीए के पास लेकर गए, पीए ने आगे एक कृष्ण नाम के व्यक्ति से बात की। इसके बाद कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में बुलाकर मोनिका को फर्जी ज्वॉइनिंग लेटर दे दिया और उससे असली दस्तावेज तथा 15.50 लाख रुपये ले लिए। लेकिन मोनिका को नौकरी नहीं दिलाई गई। इसी तरह मोनिका के भांजे प्रज्ज्वल से भी इन आरोपियों ने नौकरी लगाने के नाम पर 4.30 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है। इस तरह आरोपियों ने कुल 19.80 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी। इस शिकायत पर 20 जून को मधुबन थाने में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद मामले की जांच सीआईए टू को दी गई।
पानीपत, कैथल, जींद और करनाल से पकड़े गए आरोपी
एएसआई मनोज कुमार ने 21 जून को पांच आरोपी कृष्ण चंद निवासी गांव हाट थाना सफीदों जिला जींद, अनिल कुमार निवासी अशोक विहार, संजीव कुमार निवासी गांव जौरोसी पानीपत, शशिपाल निवासी शास्त्री नगर, समालखा पानीपत, विरेंद्र शर्मा निवासी नेहरू गार्डन कैथल को करनाल कैथल रोड से गिरफ्तार किया गया। जांच में खुलासा हुआ कि शशिपाल का दोस्त आरोपी संजीव पंचकूला में बिजली निगम में नौकरी करता है। जिसने आगे आरोपी कृष्ण से संपर्क किया था। आरोपी कृष्ण का दोस्त आरोपी अनिल है और अनिल का दोस्त आरोपी विरेंद्र शर्मा है। इस प्रकार आरोपियों ने एक गैंग बनाया था। आरोपी विरेंद्र शर्मा ने एक असली ज्वॉइनिंग लेटर में एडिटिंग करके मोनिका के नाम का फर्जी ज्वॉइनिंग लेटर तैयार किया था। आरोपियों को अदालत में पेश कर चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। ताकि धोखाधड़ी की रकम सहित अन्य चीजे बरामद की जा सके।
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