जिले में लोगों का विश्वास धीरे-धीरे पुलिस से उठता जा रहा है। कई बड़े मामलों को सुलझाने में पुलिस नाकाम रही है। अखिल चौहान आत्महत्या मामला हो या गांव जोहड़ माजरा की लड़की की हत्या।
युवक केतन चौहान के अपहरण का केस हो या फिर ढाई साल के बच्चे कृष्णा के लापता होने का मामला। इन मामलों में पुलिस की जांच से असंतुष्ट परिजन बुधवार को सीधे पुलिस महानिदेशक श्रीनिवास वशिष्ठ के समक्ष शिकायत लेकर पहुंचे।
अखिल चौहान के परिजनों ने आईजी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और पुलिस विभाग के खिलाफ डीजीपी की मौजूदगी में नारेबाजी की। वे अखिल चौहान आत्महत्या मामले में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।
इस मामले की जांच पहले ही क्राइम ब्रांच कर रही है लेकिन अखिल के परिजन क्राइम ब्रांच की जांच से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने डीजीपी से मामले की जांच किसी अन्य अधिकारी से कराने की मांग की। जिस पर डीजीपी ने उन्हें ही पुलिस अधिकारी का नाम देने के लिए कहा।
अखिल के पिता बलवान सिंह और मां कृष्णा का कहना है कि वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक उनके बेटे की मौत के दोषियों को सजा नहीं मिल जाती।
क्राइम ब्रांच करेगी छात्रा हत्याकांड की जांच
इंद्री के गांव जोहड़माजरा की छात्रा की हत्या के मामले की जांच अब क्राइम ब्रांच करेगी। छात्रा के परिजन डीजीपी वशिष्ठ से मिले और पुलिस की जांच पर असंतोष जाहिर किया।
उन्होंने कहा कि पुलिस उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है और मामले को नया मोड़ देने की कोशिश कर रही है। परिजनों का कहना है कि छात्रा की दुराचार के बाद हत्या की गई थी।
उन्होंने यह जांच क्राइम ब्रांच को सौंपने की मांग की, जिसे डीजीपी ने मानते हुए तत्काल मामला क्राइम ब्रांच को सौंपने के आदेश दिए।
केतन सरदाना का नहीं लगा सुराग
करीब एक हफ्ते से जूता व्यापारी के अपहृत बेटे केतन सरदाना का कोई सुराग नहीं लगा है। केतन के परिजन इस मामले में डीजीपी श्रीनिवास वशिष्ठ से मिले और त्वरित कार्रवाई करने की मांग की।
डीजीपी ने बताया कि यह एक बेहद संजीदा केस है जिसके लिए मेरठ रेंज के आईजी से उन्होंने बात की है। दोनों प्रदेशों की पुलिस केतन की तलाश में जुटी है। फिल्हाल पूरी स्थिति का खुलासा करना संभव नहीं है।
बाहर से लौट गए कृष्णा के परिजन
एक फरवरी से लापता अढ़ाई साल के बच्चे कृष्णा का अभी तक भी कोई सुराग नहीं लगा है। अपने बच्चे की तलाश की आस लगाए परिजन डीजीपी से मिलने आईजी कार्यालय पहुंचे।
उन्होंने हाथों में नारे लिखी तख्तियां पकड़ी हुई थी लेकिन उन्हें बाहर से ही लौटना पड़ा। उनकी आवाज डीजीपी तक नहीं पहुंचने दी गई।