1892 में बनाया गया ए श्रेणी का हेरिटेज स्टेटस प्राप्त करनाल रेलवे स्टेशन ने इस साल अपने 125 साल पूरे कर लिए हैं। यहां के रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन 10 से 15 हजार यात्री दिल्ली और अंबाला रूट पर सफर करते हैं, लेकिन इसके बाद भी यहां के स्टेशन पर रुकने से ज्यादा ट्रेनें धड़धड़ाते हुए निकल जाती हैं। रेलवे बजट में भी करनाल का हाथ हर साल खाली रहता है, जो घोषणाएं हुई भी हैं, वे भी सालों से फाइलों में ही अटकी हैं। करनाल के लोगों ने रेल मंत्री सुरेश प्रभु से मांग की कि इस बार करनाल स्टेशन के 125 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में बर्थडे गिफ्ट ही दे दिया जाए।
यहां के दैनिक यात्रियों ने रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं बढ़ाने और घोषणाओं की लंबी सूची बना रखी है। इसे समय-समय पर रेलवे विभाग, मुख्यमंत्री और सांसद को भेज कर याद दिलाते रहते हैं। दैनिक यात्री एवं समाजसेवी राजीव कुमार ने इस बार भी रेल बजट से पहले यहां के दैनिक यात्रियों के साथ मिलकर 24 मांगों की लिस्ट बना कर 3 दिसंबर 2016 को रेलवे मंत्री, मुख्यमंत्री और सांसद को भेजा दिया है। हालांकि इन्हें भी आम बजट के साथ पहली बार संयुक्त रूप से प्रस्तुत हो रहे रेल बजट में अपनी मांगें पूरी होने की उम्मीद कम ही है। राजीव ने बताया कि करनाल रेलवे स्टेशन उम्र में पानीपत रेलवे स्टेशन से पांच साल बड़ा है और अंबाला रेलवे स्टेशन से एक साल छोटा, लेकिन सुविधाओं के मामले में करनाल दोनों स्टेशनों से दशकों पीछे हैं। दर्जनों ऐसी गाड़ियां हैं जो पानीपत और अंबाला रेलवे स्टेशन पर रुकती हैं, लेकिन करनाल पहुंचने पर यहां के लोगों को चिढ़ाते हुए बिना रुके निकल जाती हैं।
25 से अधिक ट्रेनों का नहीं स्टॉपेज, शताब्दी सिर्फ एक
करनाल रेलवे स्टेशन को बने भले ही 125 साल पूरे हो गए हों, लेकिन यहां पर ट्रेनों का टोटा अभी भी बना हुआ है। 25 से अधिक ऐसी ट्रेनें हैं जो आज भी करनाल में नहीं रुकती। वहीं शताब्दी की संख्या भी सिर्फ एक ही है। इन ट्रेनों को रोकने के लिए करनाल के लोग कई बार प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। राजीव ने बताया कि करनाल के लोगों को न्यू दिल्ली अमृतसर शताब्दी, न्यू दिल्ली कालका शताब्दी, स्वराज सर्वोदय जम्मूतवी, उत्तर संपर्क क्रांति जैसी करीब 25 ट्रेनें यहां बिना रुके चली जाती हैं। हरियाणा में शताब्दी ट्रेनों का स्टॉप 200 किलोमीटर में सिर्फ एक है, वहीं पंजाब में जब ये ट्रेनें पहुंचती हैं तो वहां पर 250 किलोमीटर के अंदर इन ट्रेनों का 6 स्टॉपेज हो जाता हैैै। इससे साफ जाहिर होता है कि रेलवे की नजर में हरियाणा उपेक्षा का शिकार रहा है। यहां के नेताओं ने भी इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाई।
ईएमयू और पसेंजर ट्रेनों का भी टोटा
शताब्दी और एक्सप्रेस ट्रेनों की तरह करनाल में ईएमयू और पसेंजर ट्रेनों का भी टोटा है। यहां से दिल्ली और अंबाला की तरफ सिर्फ पांच पसेंजर ट्रेनें चलती हैं, बाकी ट्रेनें या तो कुरुक्षेत्र में रुक जाती हैं या फिर पानीपत में। राजीव ने बताया कि अंबाला से कुरुक्षेत्र तक चलने वाली 64483/4, 64645/6, 74993/4 घंटों कुरुक्षेत्र स्टेशन पर खड़ी रहती हैं। इन ट्रेनों का विस्तार कर पानीपत या सोनीपत तक चलाई जाए। इसी तरह दिल्ली से पानीपत के बीच चलने वाली 64531/2, 64001/2, 644533/4, 64463/64, 64469/70, 64471/2 को कुरुक्षेत्र या अंबाला तक चलाई जाए।
जंक्शन बनने के लिए दशकों से इंतजार
रेलवे जंक्शन बनाने की पहली बार घोषणा करीब दो दशक पहले रेलवे बजट की गई थी, लेकिन यह फाइलों में ही घूम रही हैैै। वहीं काम के नाम पर अभी तक सिर्फ सर्वे कार्य ही हो रहा है। रेलवे बजट में अब तक करनाल से पांच नई लाइनों को शुरू करने की घोषणा हो चुकी है, लेकिन काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है। 1998 में प्रस्तुत किए गए रेलवे बजट में पहली बार करनाल से वाया इंद्री, लाडवा, रादौर यमुनानगर रेलवे लाइन बनाने की घोषणा की गई। इसके बाद 2010 और 2011 के रेलवे बजट में करनाल से कैथल रेलवे लाइन, करनाल से जींद, करनाल से पटियाला और करनाल से हरिद्वार रेलवे लाइन बनाने की घोषणा की गई। करनाल स्टेशन अधीक्षक विरेंद्र कुमार के अनुसार अभी सभी लाइनों का सर्वे चल रहा है।
करनाल स्टेशन पर शताब्दी और अन्य ट्रेनों का स्टॉपेज बढ़ाने के लिए रेलवे मंत्री को पत्र लिखा है। साथ ही यहां से एक-दो नई ट्रेनों को शुरू करने की भी मांग की है। समय-समय पर यहां के यात्रियों की समस्या भी रेल मंत्रालय तक पहुंचाई जाती है। उम्मीद है कि इस बार के बजट में करनाल को काफी कुछ मिलेगा।
-अश्वनी चोपड़ा, सांसद