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जिले में लापता हो रहे हैं लोग, पुलिस उन्हें ढुंढने में असमर्थ

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जिले में हर रोज औसतन तीन लोग लापता हो रहे हैं। जनवरी से अक्तूबर तक जिले के थानों में 808 मामले लापता के दर्ज किये गये हैं, जिनमें से 309 मामलों में पुलिस लापता लोगों का कोई सुराग नहीं लगा पाई है। खास बात यह है कि लापता होने वालों में महिलाएं अधिक हैं। इसमें पुलिस ने जो 499 मामले ट्रेस किये हैं, इनमें से अधिकतर मामलों में लापता व्यक्ति खुद ही घर वापस लौट आया है, लेकिन पुलिस का इन मामलों में नाममात्र ही प्रयास होता है। इतना ही नहीं लापता व्यक्ति के बारे में पम्पलेट चस्पा करना, अखबार, न्यूज चैनल आदि पर उसकी जानकारी देने का काम भी परिजन ही करते हैं। पुलिस सिर्फ मामला दर्ज करने तक सीमित है। पिछले वर्ष की तुलना में लापता लोगों की संख्या भी कई गुणा है। पिछले वर्ष 146 मामले दर्ज किये गये थे।
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2019 में लापता होने वालों की संख्या
महीना पुरुष महिलायें बच्चे
जनवरी 18 43 03
फरवरी 19 30 03
मार्च 35 30 03
अप्रैल 38 45 05
मई 48 38 03
जून 37 50 03
जुलाई 55 54 04
अगस्त 32 53 02
सितंबर 34 46 02
अक्तूबर 34 39 02
टोटल 350 428 30
2018 में 142 मामले हुए दर्ज
आयु - पुरूष - ट्रेस - महिलाएं - ट्रेस
0-5 - 0 - 0 - 0 - 0
5-14 - 10 - 1 - 1 - 0
14-18 - 3 - 0 - 10 - 2
18-25 - 14 - 0 - 27 - 2
25-40 - 25 - 1 - 21 - 2
40-60 - 20 - 0 - 5 - 0
60 प्लस - 2 - 1 - 4 - 0
टोटल - 74 - 3 - 68 - 6
जाते हैं दिल्ली और हो जाते हैं गुम
इस वर्ष 10 महीनों में लापता बच्चों के 30 मामले दर्ज हुये हैं। इनमें अधिकतर बच्चे मिल गये हैं, जिन्होंने बताया कि वे दिल्ली घूमने गये थे। बच्चों में दिल्ली घूमने का क्रेज है वह रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में बैठते हैं और दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उतरते हैं, लेकिन राजधानी की चकाचौंध में कुछ बच्चे गुम हो जाते हैं जबकि कुछ बच्चे वापस लौट आते हैं।
लापता लोगों के बारे में जैसे ही थाने में शिकायत आती है तो तुरंत मामला दर्ज कर उस व्यक्ति की तलाश शुरू कर दी जाती है। साइबर सेल की भी मदद ली जाती है। अधिकतर मामलों में व्यक्ति खुद ही घर से बिना बताये कहीं जाते हैं। परिजनों को चाहिए वे अपने बच्चों को समय दें और लगातार उनके साथ बातचीत करें। कई बार परिवार का माहौल भी इस पर निर्भर करता है। पुलिस अपने स्तर से पूरा प्रयास करती है। -सुरेंद्र सिंह भौरिया, एसपी करनाल।
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