नितेश कुमार का मैच लाइव देखते हुए।
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पेरिस पैरालंपिक में पैरा बैडमिंटन की एकल स्पर्धा में नितेश कुमार के स्वर्ण पदक जीतने से कर्ण नगरी करनाल में खुशी का माहौल है। 2017 में कर्ण स्टेडियम से वरिष्ठ कोच का सफर तय कर नितेश इस बार पैरालंपिक में स्वर्ण पदक विजेता बन गए हैं।
चरखी दादरी के नांदा गांव निवासी नितेश के पिता विजेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी बचपन से खेलों में रुचि रही है। वह स्कूल स्तर पर सभी खेलों में भाग लेते थे। 2009 में रेल दुर्घटना में पैर गंवाने के बाद नितेश ने पैरा बैडमिंटन में किस्मत आजमाई। नितेश ने 2016 से बैडमिंटन का सफर तय कर निरंतर नए आयामों को छूते हुए इस मुकाम को हासिल किया। नितेश के पिता भारतीय नेवी से सेवानिवृत्त तथा मां गृहिणी हैं। बहन की शादी हो चुकी है।
नितेश ने सोमवार को आयोजित फाइनल मैच में ब्रिटेन के डेनियल बेथेल को 23-21 से हराकर यह मुकाबला जीता है। नितेश के मैच का लाइव प्रसारण देखने के लिए शहर की बी-24 अकादमी में बड़ी स्क्रीन लगाई गई। नितेश के मैच के दौरान अकादमी संचालक नरेंद्र कुकरेजा व भाटिया व तीनों कोच ने खिलाड़ियों के साथ बैठकर मैच देखा।
इस दौरान बी-24 अकादमी का बैडमिंटन कोर्ट भी जय मां भारती के उद्घोष से गूंज उठा। खिलाड़ियों को लड्डू बांटकर अकादमी में खुशी मनाई गई।
कर्ण स्टेडियम में मोबाइल पर देखा लाइव प्रसारण
कर्ण स्टेडियम में खिलाड़ियों ने नितेश कुमार के मैच का मोबाइल फोन पर लाइव प्रसारण देखा। नितेश का फाइनल मुकाबला जीतते ही स्टेडियम में भारत माता की जय के नारे लगाए गए। खेल विभाग के उप निदेश व वरिष्ठ बैडमिंटन कोच राकेश पांडेय ने बताया कि नितेश ने इस मुकाम को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की है। वह रोजाना बच्चों को अभ्यास करवाने के बाद घंटों अभ्यास करते थे।