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छूट मिलने पर मध्यमवर्ग खुश व व्यापारी खुश, किसान के हाथ फिर हाथ लगी मायूसी

Thu, 02 Feb 2017 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
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नोटबंदी के बाद पेश किए गए पहले आम बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली के पिटारे से सभी के लिए कुछ न कुछ निकला है। इस बजट में किसान, युवा, महिला, नौकरीपेशा, बुजुर्ग, व्यापारी और उद्योगपति सभी का ख्याल रखा गया है। एक्सपर्टों की मानें तो बजट में कोई ठोस प्रावधान न कर आंकड़ों के बाजीगिरी दिखाई गई है। अमर उजाला ने बजट के बारे में आम लोगों की राय जानी जिसमें शहर के लोगों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी।
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कहीं पर लोगों ने बजट की आलोचना की तो कहीं पर बजट की तारीफ। नौकरीपेशा और मिडिल क्लास की नजर में करमुक्त आय की सीमा तीन लाख रुपये करने एवं पांच लाख रुपये तक की आय पर आयकर कम करना स्वागत योग्य है। वहीं, 50 करोड़ तक के टर्नओवर पर टैक्स छूट एवं कैपिटल टैक्स को स्थित रखने पर ज्यादातर व्यापारियों एवं उद्योगपतियों ने खुशी जताई है, लेकिन किसानों के लिए केंद्र सरकार द्वारा की गई 60 दिन की ब्याज माफी, फसल बीमा योजना में कवरेज को 40 फीसदी बढ़ाने जैसी घोषणाओं को किसानों ने नाकाफी बताया है। किसानों ने बजट को मायूस बताया है।


बजट पर नौकरी पेशा की राय
सरकार ने तीन लाख तक सालाना इनकम को टैक्स के दायरे से बाहर रखकर युवाओं और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत दी है। इससे हमें सेविंग करने और अपने भविष्य को बनाने में मदद मिलेगी। बजट संतुलित है, इसमें सभी के लिए कुछ न कुछ है।
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- डॉ. राजन लांबा।

टैक्स स्लैब में कर्मचारियों के लिए जो छूट दी गई है उसे बढ़ाया जाना चाहिए था। नौकरीपेशा लोगों को 5 लाख रुपये तक की कमाई पर टैक्स में छूट दी जानी चाहिए थी। यह हम लोगों के लिए नाकाफी है।
- डॉ. सन्नी

टैक्स देने वालों को सरकार द्वारा अलग से मूलभूत सुविधाएं दी जानी चाहिए। इससे जिस तरह दूसरे देशों में लोग खुशी से टैक्स देते हैं, भारत में भी देंगे। सरकार टैक्स में छूट देने के साथ टैक्स देने वालों का भी ध्यान रखे।
- डॉ. प्रवीन भारद्वाज

टैक्स में छूट देने के साथ सरकार अगर घर और कार लोन के ब्याज में भी छूट देती तो हमें राहत मिलती। सरकार के इस बजट से खुशी तो मिली है, लेकिन तब भी यह बजट उम्मीद के मुताबिक नहीं है
- डॉ. आईपी शर्मा


बजट पर किसानों की राय

बजट में किसानों के लिए कोई राहत नहीं दी गई। दस लाख करोड़ रुपये किसानों के कर्ज के लिए आवंटित करने के लिए बजट में प्रावधान करके सरकार वाहवाही लूटने का प्रयास कर रही है, लेकिन किसानों की आमदनी बढ़ाने, कर्ज में डूबे किसानों को कर्ज चुकता करने के उपाय बजट में नहीं बताए गए। आंकड़ों से किसानों का भला होने वाला नहीं है।
-रतन मान, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन।


सरकार द्वारा घोषित योजनाओं से खेती में क्रांति आएगी। सिंचाई सुविधाएं सुलभता से उपलब्ध हो सकेंगी। बशर्ते सरकार इन योजनाओं को जमीनी हकीकत पर मापतौल कर लागू करे ताकि आने वाले समय में इसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंच सके।
- राजेंद्र आर्य, किसान।

बजट में फसल बीमा योजना में 9 हजार करोड़ के प्रावधान से करनाल जैसे जिले के किसानों को लाभ मिलेगा, जहां बारिश पर कृषि की निर्भरता है। वहीं, माइक्रो सिंचाई के लिए अलग से राशि मुहैया कराना भी एक सरकार का अच्छा कदम है। किसानों के कर्ज माफी पूरी होनी चाहिए।
- मेहताब कादियान।

आम बजट में किसान खाली हाथ रहे। सरकार ने न तो उम्मीद मुताबिक कर्जा माफ किया और न ही ब्यजदर में कटौती की। हालांकि किसानों को ऋण के लिए सरकार की अधिक बजट का प्रावधान और नाबार्ड को आधुनिक बनाने की योजना तारीफ लायक है।
- राजकुमार राणा, किसान


क्या कहती हैं महिलाएं

बजट में घरेलू सामान महंगा न होने के कारण उसे खुशी हुई है। बजट से महिलाओं के लिए फायदेमंद रहा है। सरकार ने महिलाओं की रसोई की तरफ देखते हुए बजट पेश किया है। क्योंकि हर बार बजट में रसोई का सामान महंगा होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है।
- शोभा चौहान, अध्यापिका।

कुल मिलाकर बजट ठीक रहा है। नोटबंदी के बाद से ही उम्मीद थी कि महंगाई कम होगी। इस बजट में एक तरफ तो आयकर सीमा बढ़ाई गई है, दूसरी तरफ  दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कोई अतिरिक्त करभर नहीं लगाया गया। इससे राहत मिलेगी।
-मोनिका चोपड़ा

इस बार के बजट में सबसे ज्यादा उपेक्षा महिलाओं की ही हुई है। महिलाओं को न तो स्पेशल तौर पर टैक्स में छूट दी गई और न ही रेलवे में ही टिकट छूट मिली। इस बार का बजट सिर्फ दिखावा है। इससे महंगाई बढ़ेगी।
- सरिता शर्मा

महिलाओं और बच्चों पर बजट में खास ध्यान रहा। सरकार ने जहां महिलाओं के लिए आंगनबाड़ी के माध्यम से 500 करोड़ रुपये के खर्च का विशेष प्रावधान किया है, वहीं गर्भवती महिलाओं के लिए 6000 रुपये उनके बैंक अकाउंट में सीधे डालने की जो योजना बनाई है, वह स्वागत योग्य है।
- रेनू बाला, मेयर


बजट पर वरिष्ठ नागरिकों की राय

सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए एलआईसी की नई पेंशन योजना शुरू कर काफी बेहतर काम किया है। इससे बुजुर्गों को बिना किसी टेंशन के हर साल 8 फीसदी का अश्योर्ड रिटर्न मिल पाएगा। सरकार की इस योजना से काफी फायदा मिलेगा।
- जेआर कालड़ा

सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य सुविधा के लिए आधार आधारित स्मार्ट कार्ड बनाने की योजना लाभकारी है। इसका अमीर-गरीब सभी बुजुर्गों को लाभ मिलेगा। इस योजना से बुजुर्ग अब अपने स्वास्थ्य को लेकर टेंशन फ्री हो सकता है।
- सोमनाथ सचदेवा

इस बार के बजट में बुजुर्गों को सिर्फ स्वास्थ्य और पेंशन के क्षेत्र में ही छूट मिल पाई। उम्मीद थी कि सरकार इस बार बुजुर्गों को रेलवे व अन्य ट्रांसपोर्ट के किराया को पूरी तरह माफ करेगी। हालांकि बजट अन्य लोगों के काफी बेहतर है।
- केपीएस तोमर

बुजुर्गों के साथ-साथ यह बजट सभी के लिए अच्छा है। सरकार से जैसी उम्मीद थी, बजट उसी तरह से आया। खासकर युवा वर्ग, नौकरीपेशा और किसानों का काफी ख्याल रखा गया है। बुजुर्ग के लिए भी बजट में काफी कुछ है।
- केहर सिंह चोपड़ा


बजट पर उद्योगपति और व्यापारी की राय

ट्रांजेक्शन लिमिट तय करते हुए आईटी एक्ट में बदलाव एक सकारात्मक कदम है। तीन लाख से ज्यादा कैश ट्रांजेक्शन की इजाजत नहीं होने से छोटे व्यवसायियों को परेशानी होगी। इनकम टैक्स स्लैब को तीन लाख किया जाना स्वागत योग्य है। इससे आम लोगों को राहत मिलेगी।
- कृष्ण लाला तनेजा, व्यापारी


इसबार का बजट सिर्फ दिखावा हैै। नोटबंदी से त्रस्त व्यापारियों को सरकार ने कुछ नहीं दिया है। उम्मीद थी कि सरकार व्यापारियों को टैक्स में अतिरिक्त छूट देगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इस बजट से व्यापारी वर्ग में काफी निराशा है।
- विनोद गोयल, व्यापारी


सरकार ने इस बजट में प्रस्तावित कैपिटल टैक्स को नजरअंदाज कर व्यापारियों पर बहुत बड़ा उपकार किया है। 50 करोड़ तक के सालाना टर्न ओवर वाले व्यापारियों को भी टैक्स में 5 प्रतिशत की छूट दी गई है। सरकार की नई योजनाओं से कैशलेस प्रणाली को प्रोत्साहन मिलेगा।
- अमित गुप्ता, उपाध्यक्ष, हरियाणा चैंबर ऑफ कामर्स

उम्मीद थी कि इस बजट में विशेष रियायत की घोषणा होगी, परंतु सरकार द्वारा किसी विशेष छूट का प्रावधान नहीं किया गया। लघु तथा मध्यम उद्योगों को कारपोरेट टैक्स में पांच प्रतिशत की छूट दी गयी है जोकि एक सराहनीय कदम है।
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-गुलजार सिंह बेदी
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