संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। बदलती जीवनशैली और खानपान की गलत आदतों से छोटे बच्चों में फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ा रही है। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या पहले बड़ों में देखने को मिलती थी लेकिन अब बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। उनका मानना है कि बच्चों में नमकीन, बिस्किट, पिज्जा-बर्गर जैसे जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक्स व मीठे पेय का सेवन इस समस्या की बड़ी वजह बन रहा है।
श्रीराम चंद्र मेमोरियल अस्पताल से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमल चराया ने बताया कि कम उम्र में लिवर से जुड़ी बीमारियां आगे चलकर कई जटिल समस्याओं का कारण बन सकती हैं। यह खाद्य पदार्थ लिवर में अतिरिक्त चर्बी जमा कर रहे हैं। धीरे-धीरे यही स्थिति नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज का रूप ले लेती है, जो आगे चलकर लिवर को खराब कर सकती है। उन्होंने कहा कि थकान, पेट के दाहिने हिस्से में हल्का दर्द, वजन बढ़ना और बच्चों की सुस्ती जैसे संकेत नजर आने पर सतर्क होने की जरूरत है।
- ओपीडी में रोजाना पहुंच रहे 115 से ऊपर बच्चे
जिला नागरिक अस्पताल में करीब 115 या 150 से ऊपर की ओपीडी रोजाना इन मामलों की हो रही है। इनमें आधे से ज्यादा बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने जैसी समस्या देखने को मिल रही है। इसके पीछे यही बाहर का खानपान और घरेलू खानपान को दूर करने जैसे उदाहरण देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
- मोटापा और हृदय रोगों का बढ़ सकता है खतरा
समय पर ध्यान न देने पर यह समस्या भविष्य में डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोगों का खतरा भी बढ़ा सकती है। डॉ. कमल ने अभिभावकों को बच्चों के खानपान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। उन्होंने संतुलित आहार में हरी सब्जियां, फल, दालें और घर का बना भोजन शामिल करने के साथ-साथ बच्चों को रोजाना शारीरिक गतिविधि के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।