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जाट महासभा : गैर-राजनीतिक प्रधान की उठी मांग

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घरौंडा बैठक में उप​स्थित जाट समाज के लोग। संवाद
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घरौंडा। करनाल जिला जाट महासभा के आगामी चुनाव पर बुधवार को घरौंडा की नई अनाज मंडी स्थित सामुदायिक केंद्र में जाट समाज की अहम बैठक हुई। अध्यक्षता सुभाष घनघस ने की। बैठक में मांग की गई कि समाज का प्रधान किसी राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ नहीं होना चाहिए। सभी पांच जोनों की बैठक के बाद 20 सितंबर को करनाल में अंतिम रणनीति तय की जाएगी।
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बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि महासभा का आगामी प्रधान ऐसा होना चाहिए, जो किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा न हो और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता हो। पूर्व प्रधान भूपेंद्र सिंह लाठर के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए गए और धर्मशाला में विकास कार्यों की कमी पर नाराजगी जताई गई।
सुखबीर संधू, सुरजीत संधू और उत्तम घनघस सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि जिले के तीनों जोनों में बैठकों का दौर पूरा हो चुका है। अब सभी जोन की राय के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से धर्मशाला में अपेक्षित विकास कार्य नहीं हुए, जिससे समाज में असंतोष है।
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बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा गैर-राजनीतिक प्रधान की मांग का रहा। वक्ताओं ने कहा कि महासभा का प्रधान समाज की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला होना चाहिए और उसे किसी राजनीतिक हित से ऊपर उठकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सहमति आधारित होनी चाहिए, ताकि समाज में एकता बनी रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पूर्व प्रधान और उनके परिवार की ओर से समाज की बात को स्वीकार नहीं किया गया, तो समाज सामूहिक निर्णय के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।
मंगलवार को जाट धर्मशाला में बैठक कर भूपेंद्र सिंह लाठर को सर्वसम्मति से प्रधान पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था, जिसके बाद घरौंडा में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। लाठर कांग्रेस से जुड़े हैं और पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान घरौंडा विधानसभा सीट से टिकट के भी दावेदार रहे।
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