पानीपत। दुर्घटना के बाद ड्राइविंग लाइसेंस को फर्जी बताकर क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने सुनवाई के दौरान माना कि फर्जी लाइसेंस का कोई ठोस सबूत कंपनी ने नहीं दिया। जिस कारण कंपनी को अब उपभोक्ता के क्लेम के 6.92 लाख रुपये का छह प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।
सोनीपत के ऋषिपाल ने आयोग में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि उन्होंने अपनी कार का बीमा कराया था। उनकी कार वर्ष 2016 में कुरुक्षेत्र के शाहाबाद क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे के बाद मरम्मत पर करीब 6.90 लाख रुपये खर्च हुए। इसके बाद बीमा कंपनी में आवेदन कर क्लेम की मांग की थी लेकिन कंपनी ने चालक का फर्जी लाइसेंस होने का दावा करते हुए आवेदन को खारिज कर दिया।
जिस पर ऋषिपाल ने याचिका दाखिल कर क्लेम दिलाने की मांग की। आयोग ने दोनों पक्षों को सुना। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने लाइसेंस फर्जी होने का कोई ठोस प्रमाण आयोग के सामने पेश नहीं किया। जिसे आयोग ने बड़ी लापरवाही माना और कहा कि बिना ठोस कारण क्लेम खारिज करना सेवा में कमी है। आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 6.92 लाख रुपये का क्लेम छह प्रतिशत ब्याज के साथ अदालत करने के आदेश दिए हैं।