संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। नगर परिषद कार्यालय में वीरवार को प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण अधिनियम (पीएनडीटी एक्ट) के तहत गठित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें
एडीसी सोनू भट्ट ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि एमटीपी केंद्रों की नियमित रूप से जांच की जाए और उनके रिकॉर्ड रजिस्टर को चेक किया जाए। साथ ही, जिला के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का भी समय-समय पर निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि पीएनडीटी अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जा सके।
एडीसी ने बताया कि कन्या भ्रूणहत्या जैसे जघन्य अपराध को रोकने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि समाज की सोच को बदलने की जरूरत है। समाज में बेटियों को बेटों के बराबर सम्मान देने और लिंग आधारित भेदभाव समाप्त करने के लिए सामाजिक जागरूकता आवश्यक है।
उप सिविल सर्जन डॉ. शीनू चौधरी ने बताया कि गत माह जिले का लिंगानुपात 926 था और प्रदेश में जिला लिंगानुपात के मामले में पांचवें स्थान पर है। पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों और नियमों के उल्लंघन करने पर 5 वर्ष तक की सजा एवं 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है और नियमों की उल्लंघना करने वालों के खिलाफ गुप्त सूचना देने वाले को एक लाख रुपये तक का इनाम देने का भी एक्ट में प्रावधान किया गया है।