दिनोंदिन बढ़ रही महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ रही है। दाल और सब्जी के दामों में लगातार वृद्धि से जहां रसोई का बजट बिगड़ गया है। यही नहीं रसोई की अन्य चीजें भी लगातार छलांग मार रही हैं, इसमें खाद्य तेल और अन्य चीजें भी शामिल हैं। वहीं मध्यवर्गीय परिवार के खाने की थाली से दाल और हरी सब्जियां गायब होने लगी हैं। स्थिति यह है कि सर्वाधिक खाई जाने वाली अरहर व चना दाल के भाव 150 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए हैं। वहीं सब्जियों का राजा आलू भी 20 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। इतना ही नहीं सीजनल सब्जी और फलों ने भी लोगों की जेब हल्की करके रख दी है। दालों और सब्जियों के दामों हुई बढ़ोत्तरी से खाने के जायके के साथ प्रोटीन भी गायब हो गायब हो गया है। पिछले एक महीने में सभी दालों में 10 से 15 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं सभी सब्जियां भी प्रति किलो पांच से 10 रुपए महंगी हो गई हैं।
जानकारों की मानें तो बाजार में दाल की जमाखोरी होने से दामों में यह उछाल आया है, जबकि बाजार में नई दाल आना शुरू हो गई है। ऐसे में दाम बढ़ने के बजाए घटना चाहिए। इधर दाल और सब्जियों के दाम बढ़ने से जहां आम आदमी की रसोई का बजट बुरी तरह से गड़बड़ा गया है। वहीं थाली का जायका भी चला गया है। इसके अलावा पिछले कई दिनों से चीनी के दाम भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थों के दाम में इजाफा होने से देश का हर व्यक्ति प्रभावित हो रहा है। इसकी ज्यादा मार गरीबों व मध्यम वर्ग के लोगों पर पड़ रही है, जबकि प्रशासन मुनाफाखोरों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
पैदावार घटने से बढ़ रहे दाम
दाल के भाव में एक दम तेजी आने का कारण समझ नहीं आ रहा है। थोक में दाल के भाव दो से तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं, प्रदेश में दालों की कमी बताई जा रही है। इसके अलावा दूसरे राज्यों से आने वाली दालों पर अंतर्राज्यीय टैक्स लगने की वजह से भी दाम बढ़े हैं। जब माल पीछे से ही महंगा मिलेगा तो महंगा ही बेचा जाएगा।
प्रेम, व्यापारी, पुरानी सब्जीमंडी।
प्रदेश में गर्मी और बरसात के चलते सब्जियों का उत्पादन कम हो गया है। अब ज्यादातर सब्जियां व फल दूसरे राज्यों से आ रहे हैं। इसी वजह से हर सब्जी के दाम प्रति किलो पांच से 10 रुपये बढ़ गए हैं। इससे जहां लोगों को परेशानी हो रही है। वहीं सब्जी की बिक्री भी कम हो गई है। भाव बढ़ने का असर केवल खरीददार पर ही नहीं, सभी पर पड़ता है।
दर्शन कुमार, सब्जी विक्रेता, नई सब्जीमंडी।
पैदावार कम नहीं, जमाखोरी से बढ़ रहे दाम
सब्जीमंडी में पहुंचे किसान रामकुमार ने कहा कि दालों की पैदावार कम होने से नहीं, व्यापारियों की जमाखोरी के चलते दालों के दाम बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों की जमाखोरी रोकने के लिए भले ही शासन ने कानून बना लिया हो। लेकिन इसका पालन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है। लोगों के हंगामा करने पर ही प्रशासन मुनाफाखोरों की सुध लेता है। वरना तो वे अपनी मर्जी से ही मन चाहे दाम पर सामान बेचते हैं।
सब्जियों के थोक और फुटकर के दाम
सब्जी पुराना दाम नये दाम थोक के दाम
आलू 10-12 15-20 10-12
प्याज 8-10 12-14 8-10
टमाटर 15-20 45-50 25-30
भिंडी 12-15 20-25 18-20
तोरी 18-20 25-30 20-22
हरी मिर्च 15-20 25-30 18-22
मटर 35-40 75-80 55-60
करेला 10-12 18-20 12-14
(दाम रुपये प्रति किलो में)
दालों और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम
दाल नए दाम प्रति किलो पुराने दाम -प्रति किलो
चना दाल 90 52
अरहर 150 130
उड़द 140 130
मलका 75 70
राजमा 72 65
सफेद चना 105 60
खाद्य तेलों के दाम
तेल नए दाम प्रति लीटर पुराने दाम प्रति लीटर
रिफायंड 75 70
सरसो तेल 90 85
वनस्पति घी 75 68
देसी घी 410 370