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इंतजार में बढ़ रहा मरीजों का मर्ज

Tue, 09 Jun 2015 01:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला करनाल
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जिले के लोगों को मेडिकल सुविधाएं नहीं मिल रही है। अस्पतालों में अव्यवस्थाओं का आलम है। मरीज को इलाज से पहले पर्ची लेने और उसके बाद डॉक्टर तक पहुंचने के लिए अपने नंबर आने का इंतजार करना पड़ रहा है। इसके बाद जांच रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन गुजर रहे हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों का मर्ज बढ़ रहा है।
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हालात ऐसे हो गए हैं कि तंग आए मरीज आए दिन हंगामा कर रहे हैं और इनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। पीएसची, सीएचसी की नहीं बल्कि मेडिकल कॉलेज तक के यही हालात हैं।
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल एक ही जगह चल रहे हैं। इनमें सुविधाएं नाममात्र हैं। मेडिकल कॉलेज में भी एमआरआई की सुविधा नहीं है। सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, ब्लड चेकअप की सुविधा है, वह मरीजों को मिलती नहीं है। क्योंकि डॉक्टर कम है।
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ऐसे में यहां से डॉक्टर नदारद रहते हैं और मरीज दिनभर डॉक्टर का इंतजार करते हैं। अस्पताल में फ्री इलाज की लालसा से भी मरीजों की संख्या रोजाना की 1800 है। अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, ब्लड चेकअप बिल्कुल नि:शुल्क है। मेडिकल कॉलेज में दाखिल मरीजों के लिए 300 रुपये और ओपीडी में आने वाले मरीजों के लिए 600 रुपये में सीटी स्कैन होता है। मरीजों का कहना है कि सरकार ने रियायत तो दी हुई है, लेकिन इनका फायदा तब है जब मरीजों को सुविधा मिलती हो। मरीजों का सवाल है कि सरकारी अस्पताल में जब टेस्ट होते ही नहीं हैं तो यह सुविधा देने का फायदा क्या है।

डॉक्टर तक पहुंचने में लगते हैं दो दिन
मरीज रुक्मिणी, कमला देवी ने कहा कि अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए दो दिन से आ रही हैं। अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। सुबह आठ बजे आते हैं। लंबी लाइन लगी रहती है। कभी डॉक्टर न आने के कारण नंबर नहीं आता। जिस दिन डॉक्टर आते हैं उस दिन सात से आठ मरीजों की पर्ची लेकर अन्य मरीजों को अगले दिन आने को बोल देते हैं। मरीज राजेश ने कहा कि उनकी पत्नी आशा वर्कर हैं। स्टाफ के लिहाज से भी डॉक्टर नंबर नहीं डाल रहे हैं। बड़ी सिफारिश पर डॉक्टर अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं। अल्ट्रासाउंड न होने पर कुछ दिन पहले दर्जनों मरीजों ने हंगामा कर मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. सुरेंद्र कश्यप को शिकायत कर चुके हैं। रामकेश, सुरेंद्र सिंह, बिमला देवी ने बताया कि वे तीन दिन से अल्ट्रासाउंड के लिए धक्के खा रहे हैं, हर बार उन्हें कल के लिए बोल दिया जाता है।

असंध में सब रामभरोसे
असंध के अस्पताल में न तो अल्ट्रासाउंड मशीन है और न ही सीटी स्कैन। उपमंडल का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद स्थिति इतनी खराब है कि अस्पताल में छोटे टेस्ट के लिए धक्के खाने पड़ते हैं। मरीजों की संख्या पहले के मुकाबले अब कम होने लगी है, क्योंकि यहां पर सुविधाएं नहीं है। यहां के विधायक भी असंध अस्पताल को लेकर कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं। वहीं, नीलोखेड़ी, घरोड़ा,तरावड़ी, बल्ला कस्बों में ही हालात बदले नहीं हैं।

मजबूर होकर प्राइवेट लैब से करवाते हैं चेकअप  
इंद्री। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इंद्री में असुविधाओं के कारण मरीजों के लिए जंजाल बनी है। केंद्र में अल्ट्रासाउंड मशीन, सीटी स्कैन, एमआरआई की कोई मशीन नहीं है। डॉक्टर बताते हैं कि केंद्र में लगी एक्सरे मशीन खराब पड़ी हैं। इसके लिए वे कई बार विभाग को लिख चुके हैं।

गांव बीबीपुर जाटान निवासी बलदेव राज का कहना है कि घंटों लाइन में खडे़ होने के बाद ब्लड सैंपल लेते हैं। रिपोर्ट देने में दो से तीन दिन लगाते हैं। इसके बाद जांच रिपोर्ट में देेने में टरकाते रहते हैं। ऐसे में मरीज परेशान होकर प्राइवेट लैब पर जाकर ही चेकअप करवाते हैं। केंद्र में लैब में एचआईवी टेस्ट करवाने के लिए मरीज तो आते हैं उन्हें रटा-रटाया एक ही जवाब मिलता है कि हमारे पास एचआईवी टेस्ट के लिए कोई भी उपकरण मौजूद नहीं है। निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड व सीटी स्कैन और एक्सरे के नाम पर मरीजों के साथ लूट की जाती है। निजी लैब संचालक मनमर्जी के रेट लेते हैं और तुरंत रिपोर्ट देते हैं। सूत्रों का कहना है कि इसमें पूरा खेल होता है और सरकारी कॉलेज के अंदर ही निजी लैब के दलाल खड़े रहते हैं और वहीं से मरीजों को अपनी लैब में लाते हैं। इसके बदले डाक्टर उन्हें कमीशन देते हैं। कालेज प्रशासन की इस लापरवाही के कारण मरीजों की जेबें कट रही हैं।
उधर मेडिकल कालेज एवं अस्पताल करनाल के पीएमओ डॉ. योगेश शर्मा, पीएमओ ने बताया कि इमरजेंसी मरीजों को सिटी स्कैन की रिपोर्ट अगले दिन देते हैं। रूटीन में सिटी स्कैन रिपोर्ट दो से तीन दिन बाद मरीजों को दी जाती है। अल्ट्रासाउंड, एक्सरे व ब्लड चेकअप रिपोर्ट दो से तीन घंटे के बाद दे दी जाती है। जो सुविधा है उसके मुताबिक बेहतर इलाज देने की कोशिश रहती है।
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