संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। लगातार पेट दर्द, भूख कम लगना, पीलिया या अचानक वजन घटने को लोग सामान्य कमजोरी समझकर टाल देते हैं। ये अग्नाशय कैंसर के लक्षण भी हो सकते हैं। जब तक डॉक्टर के पास पहुंचते हैं कैंसर दूसरे स्टेज में पहुंच चुका होता है। राष्ट्रीय अग्नाशय कैंसर जागरूकता दिवस पर यह चेतावनी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जिले में नशे और अनियमित जीवनशैली के कारण अग्नाशय के कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
एनसीडी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में अब तक 809 कैंसर मरीज हैं, जिनमें करीब पांच प्रतिशत अग्नाशय कैंसर से पीड़ित हैं। चिंताजनक बात यह है कि करीब दो प्रतिशत मरीज युवा वर्ग से हैं। जिला नागरिक अस्पताल से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलबीर का कहना है कि यह आमतौर पर शराब-सिगरेट जैसी आदतों इस बीमारी को तेजी से बढ़ा रही हैं। ज्यादातर बढ़ती उम्र के लोगों में ही मिलता है।
- नशे का असर समझ न करें नजरअंदाज
नशा करने वाले लोग दर्द व थकान को नशे का असर समझकर टाल देते हैं। कामकाज की व्यस्तता और डर के कारण लोग जांच कराने में देरी कर देते हैं। इस कारण अग्नाशय कैंसर दूसरे स्टेज तक पहुंच जाता है।
- शुरुआत में नहीं मिलते खास संकेत
अग्नाशय कैंसर के शुरुआती लक्षण पीलिया (आपकी त्वचा का पीला पड़ना), गहरे रंग का मूत्र, हल्के रंग का मल, ऊपरी पेट में दर्द, मध्य पीठ दर्द, थकान, खुजली वाली त्वचा, गैस या पेट फूलना, भूख की कमी, रक्त के थक्के, वजन घटना जैसी आम समस्याओं जैसे लगते हैं। बीमारी का शुरुआत में पता नहीं चलता। लोग जांच नहीं करवाते और खुद दवा लेने की बीमारी को बढ़ा देती है।
साल में कम से कम एक बार पेट और लीवर से जुड़ी जांच जरूर कराएं। शराब और धूम्रपान छोड़ें। हल्का-फुल्का भोजन, ज्यादा फाइबर और ताजे फल-सब्जियां खाएं। रोज 30 मिनट सैर या योग करें। पेट दर्द, भूख कम होना या वजन घटने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें। जागरूकता ही इस कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार है। - डॉ. कुलबीर, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल