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कबूतरबाजी ः अदालत में जाकर मुकर रहे अधिकतर पीड़ित

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लाखों रुपये लेकर अवैध तरीके से विदेश भेजने के मामलों की जांच कर रही एसआईटी के सामने अब बड़ी चुनौती बनती जा रही है। जैसे ही शिकायत आती है पुलिस केस दर्ज करके जांच शुरू कर देती है लेकिन बाद में पीड़ित और आरोपी मिलकर समझौता कर लेते हैं या फिर अपने पैसे ले लेते हैं। इसके बाद अदालत में जाकर पीड़ित व्यक्ति लेन-देन से ही इंकार कर देते हैं। ऐसे में कबूतरबाज बच निकलते हैं। इसका तोड़ निकालते हुए अब एसआईटी हेड आईजी करनाल रेंज भारती अरोड़ा ने शिकायतकर्ताओं से शिकायत के अलावा ठगी के मामले को लेकर एक शपथ पत्र भी लेना शुरू कर दिया है ताकि अदालत में जाकर व्यक्ति घटना से मुकर न सके और आरोपी बच न सकें। कोरोना के कारण अमेरिका ने जून माह में 76 नागरिकों को वापस भारत भेजा था। इस मामले को प्रदेश सरकार ने गंभीरता से लेते हुए स्पेशल इंवेस्टिगेटिंग टीम का गठन किया था। इसकी हैड करनाल रेंज की आईजी भारती अरोड़ा को बनाया है।
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कबूतरबाजी के 310 केस, 183 निकले आपसी लेन-देन के
अब तक एसआईटी के सामने विदेश भेजने के नाम पर ठगी के 310 केस आ चुके हैं। इनमें से 2018-19 के 46 केस हैं, जबकि एसआईटी गठित होने के बाद 264 केस सामने आए हैं। जांच के दौरान सबसे अहम जानकारी यह सामने आई कि कुल केसों में से 183 केस ऐसे हैं, जिनका विदेश भेजने के नाम से कोई ताल्लुक नहीं है, बल्कि पैसों के आपसी लेन-देन के मामले हैं। लोगों ने गलत तरीके से इसे विदेश भेजने के नाम पर ठगी की शिकायत दी। इन सभी केसों को एसआईटी की ओर से संबंधित जिलों में वापस भेज दिया गया है।
60 लाख की रिकवरी, 141 आरोपी गिरफ्तार
एसआईटी की ओर से कबूतरबाजी के मामलों में अब तक 60 लाख रुपये से अधिक बरामदगी कर चुकी है जबकि अन्य मामलों में रिकवरी के प्रयास जारी हैं। सबसे अहम बात यह है कि अब तक 141 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार छापा मार रही हैं। संभावना है कि आगामी एक सप्ताह में ऐसे कई आरोपी को पुलिस सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी में हैं।
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रोजाना दो घंटे तक पीड़ितों की दास्तां सुन रहीं आईजी
जब से करनाल की आईजी को एसआईटी का हेड बनाया गया है, यहां पर प्रदेशभर के कबूतरबाजों से परेशान लोग आ रहे हैं। इसके लिए आईजी ने रोजोना दो से तीन घंटे इन्हीं केसों की सुनवाई के लिए रखे हैं। सुबह 11 बजे से 1 बजे तक पीड़ितों की शिकायतें सुनती हैं और तथ्य होने पर संबंधित आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कराती हैं। अनुमान है कि औसतन 20 से 30 लोग रोजाना आईजी से मिलने पहुंच रहे हैं।
समाज की भलाई के लिए कानून का साथ दें : भारती अरोड़ा
सरकार और पुलिस कबूतरबाजों को लेकर गंभीर है और काफी संख्या में ठगी के आरोपियों को जेल भी भेजा है। लेकिन अब पुलिस के सामने समस्या ये आ रही है कि ज्यादातर मामलों में पीड़ित अदालत में आरोपों से मुकर रहे हैं, जिस कारण आरोपियों को जमानत मिल रही है। क्योंकि दोनों पक्ष बाहर पंचायती तौर पर समझौता कर लेते हैं और आरोपी पीड़ित के पैसे दे देते हैं, इसी एवज में आरोपी शिकायतकर्ता से एफिडेविट लेकर अदालत में लगा देते हैं। इसका लाभ उनको मिलता है। मेरा सभी पीड़ितों से कहना है कि वे पुलिस को केवल पैसे दिलाने वाली एजेंसी न समझें, वे कानून का साथ दें, ताकि दोषी लोग किसी अन्य के साथ ठगी न कर सकें। समाज की भलाई के लिए भी अदालत में स्टैंड लें। अब इन चीजों से बचने के लिए हमने शिकायत के साथ-साथ शपथ पत्र लेना शुरू कर दिया है, बावजूद इसके कुछ अदालत में मुकर रहे हैं, जो कानून और समाज के लिए गलत है।
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