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Karnal News: सोच बदलें तो जीवन बदलेगा, होंगे सफल

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत शुक्रवार को एसडी कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रेलवे रोड में कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान स्कूल की छात्राओं को तनावमुक्त जीवन जीने, पढ़ाई में आगे बढ़ने और सोच को सकारात्मक बनाने के लिए प्रेरित किया गया। मुख्य वक्ता ने कहा कि हमें अपनी सोच को बदलना होगा। सकारात्मक सोच से ही हम अपने वर्तमान हालात और जीवन को बदल सकते हैं। इससे सकारात्मक सोच के साथ ही हमारे प्रयास होंगे तो जीवन में सफलता भी मिलेगी।
मुख्य वक्ता के रूप में टेरो कार्ड रिडर, लाइफ कोच, नैचूरोपैथ एवं निफा की महिला विंग की महासचिव डॉ. भारती भारद्वाज ने शिरकत की। वहीं मुख्यातिथि प्रिंसिपल कीर्ति शर्मा रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता समन्वयक सुमन ने की। मुख्य वक्ता ने छात्राओं को सकारात्मक और नाकारात्मक सोच का जीवन पर पड़ने वाले असर में अंतर समझाया।
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उन्होंने कहा उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम परीक्षा खत्म होने के बाद कहते हैं कि कहीं हमारे नंबर कम न आ जाएं। इस बात को बार-बार सोचते हैं तो इसका असर फिर हमें परीक्षा परिणाम पर भी देखने को मिलता है। जब हम सकारात्मक सोच के साथ अच्छे परिणाम का इंतजार करते हैं तो परिणाम अच्छा भी मिलता है।
इस दौरान उन्होंने छात्राओं को ट्री मेडिटेशन सहित कई तरह की मेडिटेशन विधियों द्वारा तनाव खत्म करने के टिप्स भी दिए। इस दौरान छात्राओं की शारीरिक और मानसिक दिक्कतों को भी दूर किया गया। छात्राओं ने भी कई तरह के सवाल पूछे, जिनका वक्ता ने सटीक जवाब दिया। कार्यक्रम में मंच संचालन मनीषा अरोड़ा ने किया।
चेहरों पर दिखी चमक, बोले- आई लव माई सेल्फ

पढ़ाई और घर की दिक्कतों का असर बच्चों पर भी पड़ता है। चर्चा के दौरान कई छात्राओं ने अपनी दिक्कतों को सांझा भी किया। इसके बाद डॉ. भारती ने उन्हें मेडिटेशन की प्रक्रिया का अभ्यास कराया। इसके बाद छात्राएं और शिक्षिकाएं अपनी चिंताओं को भूलकर आई लव माई सेल्फ बोलते हुए नजर आए। और वर्तमान में जीवन के मूलभूत सुखों को लेकर प्रकृति का धन्यवाद भी करते हुए नजर आए।
सोशल मीडिया की बजाय किताबों से दोस्ती

स्कूल प्रिंसिपल कीर्ति शर्मा ने कहा कि पढ़ाई की उम्र में हमें पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। अक्सर बच्चे अब मोबाइल फोन पर सोशल मीडिया पर व्यस्त रहते हैं। मनोरंजन के लिहाज से ही इसका कुछ समय के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। सोशल मीडिया पर नकली दोस्त बनाने की बजाय किताबों से दोस्ती करके हम अपने जीवन को संवार भी सकते हैं। इस समय में पढ़ा सबक जीवन भर याद रहता है।
योग के अभ्यास से भी खत्म हो सकता है तनाव

समन्वयक सुमन ने कहा कि तनाव खत्म करने के लिए योग भी जरूरी है। वक्ता द्वारा बताई गई ट्री मेडिटेशन और अन्य विधियों का उन्होंने प्रार्थना सभा में पूरे स्कूल की छात्राओं को अभ्यास कराने का सुझाव प्रबंधन को दिया। उन्होंने कहा कि जब बच्चे तनाव से मुक्त होकर किताबों से दोस्ती करते हुए पढ़ाई करेंगे तो पढ़ाई का परिणाम भी अच्छा आएगा। मेहनत कभी भी व्यर्थ नहीं जाती, बशर्ते प्रयास अच्छा होना चाहिए।
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समाचार पत्र पढ़ने की आदत भी जरूरी

शिक्षिका मनीषा अरोड़ा ने कहा कि हमें केवल पाठ्यक्रम तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। पाठ्यक्रम से अलग कई तरह की प्रेरणात्मक पुस्तकें और समाचार पत्र पढ़ने की भी आदत डालें, इससे जहां शब्दकोष मजबूत होगा। वहीं हमारा सामान्य ज्ञान भी बढ़ेगा। प्रदेश, देश और दुनिया में क्या चल रहा है, इसकी भी जानकारी मिलेगी। पढ़ाई के साथ-साथ स्वयं को अपडेट रखना भी जरूरी है। अन्यथा प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़ते हैं।
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