संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल।
25 नवंबर को भगत सिंह से हुई बात में भगत सिंह ने उन्हें बताया था कि वह सब तरह से ठीक है, काम भी मिल रहा है तथा बहुत जल्दी सब कुछ ठीक हो जाएगा। वह 10 जनवरी, 2026 को भांजे की शादी में शामिल होने भारत आएगा। इसके बाद दो-तीन दिन परिवार के पास फोन नहीं आया तो उन्होंने वहां रह रहे चचेरे भाई मनमोहन सिंह को देखने के लिए कहा।
मनमोहन ने पता लगने के बाद भी परिवार को हत्या होने की जानकारी नहीं दी। मनमोहन ने परिवार को बताया कि भगत सिंह को चोटें लगी हुई हैं। वह अस्पताल में दाखिल है। भगत सिंह के सिर में गहरी चोटें होने के कारण वह आईसीयू में दाखिल है, वह स्वयं देखकर आया है। इसके बाद कई दिन तक मनमोहन परिवार को ढांढस बंधाता रहा कि उसने कई बार भगत सिंह से मुलाकात की है, बहुत जल्दी ठीक हो जाएगा। आईसीयू में होने के कारण डॉक्टर उनसे बात नहीं करने देते हैं।
नीलोखेड़ी की किसान बस्ती निवासी भगत सिंह (37) की इटली में हत्या कर दी गई। परिवार ने उसके साथ रहने वाले बुटाना गांव के सतीश पर हत्या का आरोप लगाया है। परिजनों को हत्या के करीब 20 दिन बाद जानकारी मिली। इटली पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
16 दिसंबर को भारतीय दूतावास से अया फोन
मृतक के भाई कृष्ण कुमार ने बताया कि 16 दिसंबर को उनके पास इटली स्थित भारतीय दूतावास से फोन आया। उन्होंने बताया कि 26 नवंबर को भगत सिंह की हत्या हो गई थी। इसके बाद ही परिवार को पूरी वारदात के बारे में पता लग पाया। कृष्ण कुमार ने बताया कि उनका चचेरा भाई मनमोहन शव को भारत लाने के लिए औपचारिकताएं पूरी करने में लगा हुआ है। कृष्ण कुमार व उनके परिवार ने सरकार व प्रशासन से आर्थिक सहयोग की गुहार लगाई है। ताकि शव को भारत लाया जा सके।
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जमीन और दुकान बेचकर गया था पुर्तगाल
किसान बस्ती निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्होंने बराना गांव में अपनी जमीन और दुकान बेचकर छोटे भाई भगत सिंह को साढ़े तीन साल पहले विदेश भेजा था। कृष्ण कुमार ने बताया कि पुर्तगाल में भगत सिंह को काम नहीं मिलने से वो काफी परेशान रहता था। इसके चलते पुर्तगाल में उसका खर्च आदि चलाने के लिए परिवार ने करीबन 15 लाख रुपए भी भेजे थे। बावजूद इसके भगत सिंह को गुजारा करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
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दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
भगत सिंह अपने पीछे पत्नी रूमा, 12 साल की बेटी और 9 साल के बेटे को छोड़ गया है। वह परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसकी मौत के बाद बच्चों के भविष्य को लेकर परिवार की चिंता और भी बढ़ गई है।