करनाल। श्रीकृष्ण गोशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में विष्णुकांत शास्त्री ने लल्ला की सुन के मैं आई, यशोदा मईया दे दे बधाई भजन गाकर सभी को बधाई दी और नाचने पर मजबूर कर दिया।
कथा में विष्णुकांत शास्त्री ने प्रवचन करते हुए बताया कि जब श्रीकृष्ण जी को यशोदा के पास छोड़ा गया तो उनको मारने के लिए पूतना सुंदर रूप धारण कर जश्न में पहुंच गई और कान्हा जी को लेकर दूध पिलाने लगी। कान्हा जी ने पहले विष पिया फिर दूध पीकर मां बना दिया और उसके बाद पूतना की जीवन लीला समाप्त कर दी।
उन्होंने बताया कि नंद तो पवित्र है, गोकुल है हमारा शरीर और पूतना अपवित्र हैं। अगर आप अपने मन को पवित्र रखेंगे तो पूतना कभी आपके पास नही आएगी। कथा प्रवचन और धार्मिक आयोजन भी उन्हें अच्छे लगते जो पवित्र होते हैं। हृदय जिसका निर्मल है प्रभु उसके ही अंदर रहते हैं वहीं प्रभु को बुलाने के लिए दिल को निर्मल रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि गाय, गायत्री और गीता की पूजा करनी चाहिए लेकिन हम सभी इन तीनों चीजों से दूर होते जा रहे है।
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