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Karnal News: माना चार दिन की है जिंदगी पर चार दिन भी...

Tue, 26 Nov 2024 07:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। मन की उड़ान साहित्यिक मंच की ओर से एमडीडी बाल भवन में साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ. आरबी कपूर ने की। मुख्य अतिथि के रूप में जिला बाल कल्याण समिति के चेयरमैन उमेश कुमार चानना व विशिष्ट अतिथि निशिकांत मित्तल, पूनम गोयल व डॉ अंजू शर्मा रही।
कार्यक्रम में डा. राकेश बहादुर कपूर द्वारा लिखित पुस्तक मैं और मेरे बिखरे अल्फाज का विमोचन एमडीडी संस्थापक पीआर नाथ, अध्यक्ष परमिंदर पाल सिंह, अंतरराष्ट्रीय मंच संचालक वरिष्ठ शायर गुलजार जिगर देवबंदी, वरिष्ठ शायर इकबाल पानीपती एवं मंच संस्थापक रामेश्वर देव ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुमारी खुशबू शर्मा ने सरस्वती वंदना से किया।
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आरबी कपूर ने रचना पढ़ते हुए कहा.. माना चार दिन की है जिंदगी पर चार दिन भी कम तो नहीं। शायर गुलजार जिगर देवबंदी ने कविता पेश करते हुए कहा कि तन्हाई को खूब सजाओ, गम का हर पल जशन मनाओ, उतरा उतरा चेहरा क्यों है, अपने दिल की बात बताओ। वरिष्ठ शायर इकबाल पानीपती ने रचना पढ़ते हुए कहा ये लम्हे जिंदगानी के बहुत अनमोल होते हैं, गंवा बैठे ना हम इक दूसरे को आजमाने में।
पूनम गोयल ने कविता पढ़ते हुए फरमाया कि दिमाग पर जोर लगा कर गिनते हो गलतियां हमारी। नफीस अंसारी खैराबादी ने अपनी रचना पेश करते हुए कहा जब कड़ी भूख दबाते हैं दिलासा दे कर, तब कहीं जा के गरीबी में दवा आती हैं। डा. अंजू शर्मा ने कविता पढ़ते हुए कहा मुहब्बत रास न आई, कहूं क्या मैं बता दे तू यही है दर्द सीने में मेरा दर्दों से नाता हैं।
मंच संस्थापक रामेश्वर देव ने अपनी रचना पेश करते हुए कहा.. जिसने मेरे प्यार को समझा मजाके जिंदगी,देव उसी के वास्ते ही आज मरना पड़ गया। संजोत सिंह ने कहा अब दिल में कोई जीने का अरमान नहीं है,जब तू ही मेरे साथ मेरी जान नहीं हैं। आशीष ताज ने रचना पेश करते हुए कहा जिंदा हूं अगर तो डूबना मुनासिफ है मरने दो मुझे मैं तैर कर दिखा दूंगा।
सुषमा चोपड़ा ने किरदार पाक साफ रख, मासूमियत बरकरार रख रचना पेश की। डॉ. श्याम प्रीति ने कहा माफ करना हमें रबड़ से सीखना होगा, पर सामने खड़े शख्श को पेसिंल सा बनना होगा। अशोक मलंग ने रचना पेश करते हुए कुछ लोग तरसते हैं दो वक्त की रोटी को, कचरे में पड़े अक्सर पकवान भी देखें हैं। रचाना पेश करते हुए प्रीति ने कहा कभी मुझको भी पढ़ो, तुझको यकीन आएगा,एक एक हर्फ तेरी यादों से लिखा जाएगा।
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कर्मजीत सिंह कविता पेश करते हुए कहा कहा गर्म हवाएं अगर उसको छू जाएं, महबूब के लिए सर्दी लिखूंगा। राजपाल राजन ने कहा हकिकत की हकिकत तो हकिकत ने बतानी हैं। पंकज गहलोत रचना पढ़ते हुए कहा तिरंगा झंडा हमको जान से प्यारा। कार्यक्रम में रमेश कुमार, कुमारी शैजल, खुशहाल राजन, पारस गहलोत, आशू ने भी प्रस्तुति दी। इस अवसर पर एमडीडी संस्थापक पीआर नाथ को 19 वां गार्शिम अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर मंच की ओर से सम्मानित किया गया।
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