हाईकोर्ट के आदेश पर शहर के सेक्टर 32-33 के प्लॉटों के ड्रा को
स्थगित करने के विरोध में आवेदनकर्ताओं ने सोमवार को हुडा कार्यालय में
जमकर बवाल काटा। आवेदनकर्ताओं का कहना है कि वो पिछले कई महीनों से ड्रा का
इंतजार कर रहे थे, लेकिन जब समय आया तो कोर्ट ने ऐन मौके पर रोक लगाकर
उनके साथ नाइंसाफी की है।
एस्टेट ऑफिसर डॉ. सुशील मलिक ने उन्हें आश्वासन
दिया कि अभी उनके पास 30 नवंबर तक का समय है, वे स्टे को हटवाने का पूरा
प्रयास करेंगे, लेकिन फिलहाल ड्रा को स्थगित कर दिया गया है। वे 30 नवंबर
तक ड्रा करवाने के लिए प्रयासरत हैं। सेक्टर के लिए जिन किसानों की जमीन
अधिगृहीत की गई है, उनको प्लाट नहीं मिलने पर वे हाईकोर्ट में जाकर स्टे
लेकर आए हैं।
विरोध जता रहे चंद्रकांता, दिनेश, सुरेश, चरणजीत, शंकर, प्रदीप, जोगिंद्र,
राकेश, सुभाष, प्रदीप कुमार, जितेंद्र और नरेंद्र ने बताया कि हुडा पॉलिसी
के तहत सेक्टर 32-33 में 1135 प्लाटों पर उन्होंने 30 मई 2014 तक आवेदन किए
थे। ड्रा निकालने की तारीख 24 नवंबर निर्धारित की गई थी। हुडा प्लॉटों पर
आवेदन कर उन्हें उम्मीद जगी थी कि हुडा में उनका भी आशियाना होगा है, लेकिन
हाईकोर्ट ने ड्रा पर रोक लगाकर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
उन्होंने कहा कि वो पिछले कई महीने से बैंक का ब्याज भुगत रहे हैं, अगर
ड्रा नहीं निकाले गए तो उन्हें घाटा होगा।
लाखों लोगों की किस्मत पर लटकी कोर्ट की तलवार
आठ फरवरी 2014 को विज्ञापन के माध्यम से सेक्टर 32-33 के 1135 प्लॉट पर
आवेदन मांगे गए थे। सेक्टर 32 में 14 मरले के 40 प्लॉट, आठ मरले के 79, छह
मरले के 74, चार मरले के 161 और सेक्टर 33 में चौदह मरले के 299, दस मरले
के 89, आठ मरले के 70, छह मरले के 267 व चार मरले के 56 प्लॉटों पर एक लाख
16 हजार लोगों ने आवेदन किए थे। ड्रा पर रोक लगने से एक लाख 16 हजार लोगों
की किस्मत पर हाईकोर्ट की तलवार लटक गई है।
किसानों की याचिका पर हुई कार्रवाई
वर्ष 2007 में हुडा की योजना में यह नियम शामिल हुआ था कि आउसटीज किसानों
को अधिगृहीत जमीन में प्लॉट दिया जाए। जब प्लॉट के लिए आवेदन मांगे गए तो
इस योजना के तहत करीब 236 किसानों ने आवेदन किया था, लेकिन इस ड्रा में यह
नहीं बताया कि आउसटीज के तहत प्लॉटों के हकदार किसानों को कितनी संख्या
में प्लॉट आवंटित किए जाएंगे, जिसकी वजह से किसानों ने हाईकोर्ट की शरण ली
और कोर्ट ने ड्रा पर रोक लगा दी।