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Karnal News: आधी सड़क घेर कर खड़े भारी वाहन बिना रिफ्लेक्टर और लाइट के फर्राटा

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नई अनाज मंडी के बाहर बिना रिफ्लेक्टर के खड़ा ट्रक। संवाद
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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। शहर के बाजारों से लेकर नेशनल हाईवे-44 तक ऐसा कोई मार्ग नहीं, जहां पर अवैध पार्किंग न हो रही हो। शहर की सड़कों पर कार तो हाईवे पर भारी व ओवरलोड वाहन रास्ते के बीच खड़े हैं। आधी सड़क घेर कर खड़े इन वाहनों के कारण हर दिन हादसे हो रहे हैं। इसके अलावा कोहरे के मौसम और रात में बिना रिफ्लेक्ट टेप व बैक लाइट के वाहन अंधेरे में फर्राटा भर रहे हैं। इन्हें भी कोई रोकने वाला नहीं है। ऐसे अनफिट वाहनों और लापरवाह चालकों की मनमानी और जिम्मेदारों के अनदेखी का खामियाजा आम जनता को हादसे के रूप में भुगतना पड़ता है।

बड़ी बात यह भी है कि हर माह होने वाली सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में उपायुक्त उत्तम सिंह और एसपी गंगाराम पूनिया, इन खड़े वाहनों पर कार्रवाई के लिए निर्देश देते हैं। इसके बाद भी एनएचएआई, हाईवे पुलिस और आरटीए की ओर से कोई जरूरी कदम नहीं उठाए गए। इधर, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर खराब और मनमर्जी से खड़े होने वाले वाहन जिंदगी और सफर को मुश्किलों में डाल रहे हैं।
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अमर उजाला की टीम ने वीरवार को करनाल नगर निगम क्षेत्र में पड़ने वाले हाईवे के अप एंड डाउन में 15 किलोमीटर का सफर किया। इस दौरान हर आधे किलोमीटर की दूरी पर कोई न कोई भारी वाहन सड़क किनारे खड़ा दिखाई दिया। चाना से लेकर पक्के पुल तक राइस मिल, गोदाम, होटल, ढाबों और पेट्रोल पंपों के नजदीक सड़क किनारे भारी वाहन ज्यादा खड़े दिखाई दिए। हादसों के ग्राफ पर नजर दौड़ाए तो हाईवे पर खड़े वाहनों के कारण एक साल में हुए 36 हादसों में 17 से लोग जान गवां चुके हैं और 50 से ज्यादा घायल हुए। फिर भी पुलिस व प्रशासन की ओर से इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

रात में हादसे की संभावना और ज्यादा

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एडवोकेट राजकुमार और संदीप राणा का कहना है कि अक्सर ओवरलोड वाहन रात में चलते हैं। भार ज्यादा होने के कारण फ्लाईओवर चढ़ते हुए कई बार वाहन अचानक खराब भी होते हैं। ओवरलोड या बॉडी से बाहर तक माल लदा होने के कारण इसके पीछे लगे रिफ्लेक्टर टेप या लाइट भी ढकने के कारण दूर से नजर नहीं आते, तो यह हादसे का कारण बनते हैं। ऐसी स्थिति में वाहन को ओवरटेक करते हुए दूसरा वाहन हादसे का शिकार होता है।




हादसे-दर-हादसे

- छह लोगों की गई जान : एक अक्तूबर को घरौंडा के महेंद्र जुनेजा की अस्थि विसर्जन के लिए हरिद्वार जाते समय हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी। इनकी कार खड़े ट्रक में ही टकराई थी। हादसे में महेंद्र की पत्नी मोहिनी (45), बड़ा बेटा पीयूष (22), जीजा पानीपत निवासी राजेंद्र (60), बहन विम्मी (50), छोटी बहन अंजू (46) और फरीदपुर निवासी ड्राइवर शिवा (23) की मौत हुई थी।

- तीन चचेरे भाइयों की मौत : पिछले दिनों कुटेल रोड पर एक खराब खड़े ट्राॅले से बाइक टकरा गई। बाइक सवार तीन चचेरे भाइयों की मौत हो गई थी। हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। सामने से आ रही एक कार की लाइट बाइक चला रहे युवक की आंखों में पड़ी थी, जिससे वह संतुलन खो बैठा और बाइक ट्राॅले के नीचे घुस गई थी।





यहां खड़े मिले भारी वाहन

- अल्फा सिटी के पास पेट्रोल पंप के पास चार जगह

- सेक्टर-5 के पास तीन जगह

- नई अनाज मंडी के नजदीक

- कंबोपुरा के पास पेट्रोल पंप के नजदीक दो जगह

- चेतक कुकर और करनाल मोटर्स के पास हाईवे पर चार जगह

- नमस्ते चौक पर उमंग होटल के पास सर्विस लेन पर वाहनों की कतार



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हम केवल चलते हुए ओवरलोड वाहन को रोककर चेक कर सकते हैं। खड़े वाहनों पर पुलिस और एनएचएआई की ओर से कार्रवाई की जाती है। हर माह औसतन 250 से ज्यादा ओवरलोड वाहनों के चालान किए जाते हैं। - विजय देसवाल, सचिव, आरटीए



-हमारी दो टो-वैन लगातार चलती हैं। कहीं वाहन खराब हो तो उन्हें हटाया जाता है। दोनों वैन टोल प्लाजा पर ही रहती हैं। खराब होने की स्थिति में या कॉल आने पर ही मदद करते हैं। - भानू प्रताप, सेक्शन इंजीनियर, एनएचएआई
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यातायात एवं हाईवे पुलिस की ओर से लगातार चेकिंग की जाती है। नो पार्किंग के कई बार चालान भी किए गए हैं। सर्दी और धुंध के मौसम को देखते हुए पेट्रोलिंग बढ़ाएंगे और सड़क किनारे खड़े होने वाले वाहनों पर सख्ती की जाएगी। - गंगाराम पूनिया, एसपी
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