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निजी अस्पताल में पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री, सरकारी अस्पताल में अटकी रही सांसें

Wed, 07 Oct 2015 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
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स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज मंगलवार को शहर के एक निजी अस्पताल में उद्घाटन समारोह में शिरकत करने के लिए पहुंचे वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पताल के स्टाफ में अफरा-तफरी मची रही। इस दौरान अस्पताल में पूरी तैयारी कर ली गई थी। डॉक्टरों ने अस्पताल को चकाचक करके रखा, साथ ही रिकॉर्ड भी दुरुस्त रखा। करीब एक घंटा तक करनाल में बिताने के बाद अनिल विज वापस चंडीगढ़ चले गए। वे विर्क अस्पताल में सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा स्थापित डायलिसिस मशीनों का उद्घाटन करने पहुंचे थे।
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अस्पताल से गायब हो गए फोल्डिंग
डेंगू व मलेरिया के चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या डबल हो रही है। कई दिनों से अस्पताल में इलाज करवाने के लिए मरीज साथ में फोल्डिंग लेकर आ रहे थे। एक-एक बेड पर दो से तीन मरीज इलाज करवा रहे हैं। सफाई व्यवस्था से लेकर अन्य समस्याओं से मरीज परेशान रहते थे। मंगलवार को अनिल विज का पहले से आना तय था और अस्पताल प्रशासन ने खामियों को छिपाने के लिए पूरी तैयार कर ली। सफाई कर्मचारी 10 से 15 मिनट के अंतराल में पोछा लगाते रहे। इतना ही नहीं वार्डों में पड़े फोल्डिंग को हटा दिया गया और एक बेड पर एक ही मरीज नजर आया।

मोबाइल से लेते रहे लोकेशन
मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का पूरा स्टाफ ड्रेस कोड में रहा। स्टाफ के कई कर्मचारी मोबाइल पर अनिल विज की पल-पल की खबर रखते रहे और अस्पताल में आएंगे या नहीं, इस बारे में चौकन्ना रहे। अस्पताल के सामने से अनिल विज का काफिला गुजरा। पुलिस की जिप्सी के बाद जैसे ही अनिल विज की कार गुजरी तो अस्पताल के स्टाफ ने एक दूसरे को सूचित किया। इसके बाद ही स्टाफ ने राहत की सांस ली।
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विज के जाते ही स्ट्रेचर से उठा ली चद्दर
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के जाते ही अस्पताल में स्ट्रेचरों पर बिछाई चादरें उठा ली गई। अस्पताल की ऐसी व्यवस्था को देखकर मरीज कहने लगे आज कोई जरूर मंत्री आने वाला है। मरीज राज, विमल, कमला देवी का कहना है कि ये व्यवस्था केवल एक दिन में ठीक नहीं हो सकती। बार-बार अस्पतालों के दौरे जरूरी हैं, ताकि गरीब लोगों को इलाज मिल सके। सरकारी अस्पताल के हालात बेकाबू हैं, लेकिन प्रबंधन कोई प्रयास नहीं कर रहा है। उधर, इस बारे में डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. योगेश शर्मा का कहना है कि रोजाना की तरह अस्पताल में काम चला। हमारा प्रयास है कि मरीजों को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
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