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7 दिन पैदल चल लुधियाना से करनाल पहुंचे थे प्रवासी मजदूर, रास्ते में पुलिस ने भी पीटा।

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सात दिनों तक भूखे प्यासे पैदल चलकर लुधियाना से करनाल पहुंचे हैं। रास्ते में जान जोखिम में डालकर यमुना भी पार करनी पड़ी, लेकिन जब हरियाणा बार्डर पर पहुंचे तो पुलिस ने व्यथा सुनने से पहले ही डंडे बरसा दिये। हाथ जोड़ते रहे लेकिन उनको रहम नहीं आई। पीट-पीटकर भगा दिया। उन डंडों से अच्छा तो हमें गोली ही मार देते। यह कहना है राधा स्वामी सत्संग भवन में ठहरे प्रवासी मजदूरों का, जिन्हें प्रशासन ने घर वापसी का भरोसा देकर ठहराया हुआ है।
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शनिवार को प्रवासी मजदूरों का हाल जानने जब राधा स्वामी सत्संग भवन अमर उजाला का प्रतिनिधि पहुंचा तो उनके सब्र का बांध टूट गया और आपबीती सुनाकर फूट पड़े। उनके आंखों से निकल रहे आंसू उनके दर्द की दास्तां बयां कर रहे थे। महिला मजदूर सुनीता देवी ने बिलखते हुए कहा कि बिहार में उसके छोटे छोटे बच्चे हैं। जब भी फोन बात होती है तो वो रोते बिलखते हुए घर आने की बात करते हैं। रोते हुए बोली- साहब, आपसे प्रार्थना है कि जल्द हमें हमारे घर भेज दो। वहीं मजदूर लछमन का कहना है कि 45 दिन से हमें यहां पर काम नहीं मिल रहा, जिसकी वजह से हम तो यहां भूखे मर ही रहे हैं। साथ ही बिहार में हमारे परिवार के सदस्यों की भी भूखे मरने की नौबत आ गई है, लेकिन अगर मरना ही हुआ तो अपने घर जाकर मरना चाहेंगे। मजदूरों का कहना था कि उनको किसी ने खाना उपलब्ध नहीं करवाया। यहां खाने के लाले पड़ गए। जब भूखे मरने की नौबत आई, तो बिहार से ही पैसे मंगवाए। उसके बाद खाने का प्रबंध किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी दयनीय स्थिति पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। मजदूरों में धर्मेंद्र, जियाजीत, रामबिलास, विकास, और पंकज समेत अन्य शामिल थे।
निसिंग ड्यूटी मजिस्ट्रेट और नायब तहसीलदार रामकुमार का कहना है कि जिला प्रशासन ने 204 मजदूरों को निसिंग भेजा है, जिनको राधा स्वामी सत्संग भवन में ठहराकर उनके खाने पीने की उचित व्यवस्था कर दी गई है। जिला प्रशासन के आदेशानुसार जल्द ही मजदूरों को इनके गृह राज्य भेज दिया जाएगा।
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