साइबर ठगी के लिए खाता उपलब्ध करवाने वाले मध्य प्रदेश के भोपाल निवासी विजय उर्फ अरुण को साइबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। निगदू के शिक्षक जयराम ठाकुर के साथ रिश्तेदार बनकर की गई 27 लाख रुपये की ठगी में से चार लाख रुपये की राशि आरोपी की ओर से साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए गए दो खातों में ही गई थी।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने अपने दूसरे साथी हर्ष प्रजापति से 15 हजार रुपये प्रति खाते के हिसाब से दो खाते खरीदे थे। दोनों खातों को राहुल नामक व्यक्ति को 30 हजार रुपये प्रति खाते के हिसाब से बेचा था। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया। उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
निगदू निवासी मास्टर जयराम ठाकुर के साथ 14 नवंबर, 2025 को ठगी की गई थी। साइबर ठग ने भतीजा बनकर कहा था कि चाचा मुझे जरूरी काम से रुपयों की जरूरत है। मैं आपके खाते में डलवा रहा हूं। आप इन्हें दूसरे खातों में भेज दें। ठगों ने मास्टर से 27 लाख रुपये अलग-अलग खातों में डलवा लिए थे। मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की थी।
साइबर थाना जांच अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की जांच में पुलिस ने 29 दिसंबर को बाराबंकी निवासी अनीत वर्मा को गिरफ्तार किया था। उसके खाते में ठगी के चार लाख रुपये गए थे। इसमें से तीन लाख 90 हजार रुपये की राशि निकलवा ली गई थी। पुलिस को पता लगा कि आरोपी ने अपना खाता किसी हर्ष प्रजापति को दिया हुआ था। इसके बाद पुलिस ने जनवरी माह में मध्यप्रदेश के भोपाल निवासी हर्ष प्रजापति को गिरफ्तार किया। उससे पुलिस को जानकारी मिली कि उसने खातों को आरोपी विजय को बेचा था। इसी आधार पर पुलिस की टीम ने विजय को हिसार जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया।
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मौसी के बेटे को दिया ऋण दिलाने का लालचसाइबर थाना पुलिस की जांच में सामने आया है कि विजय साइबर ठगों और खाते उपलब्ध करवाने वालों के बीच दलाल का काम भी करता था। वह हर्ष प्रजापति से खाते खरीदकर राहुल को बेचता था। आरोपी हर्ष प्रजापति ने अपनी मौसी के बेटे को लालच दिया कि वह उसका एक लाख रुपये का लोन करवा देगा। उसके अलावा जो राशि खाते में आएगी, वह वापस देनी होगी। उसने दूसरा खाता पास में झुग्गी में रहने वाली महिला को लालच देकर लिया था। उसे बताया था कि सरकार की योजना में फार्म भरा जाना है। उसके खाते में मकान की छत बनाने के लिए लाखों रुपये की राशि आएगी।