जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शिक्षा के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने विपक्षी पार्टी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता की फीस ब्याज सहित वापस करे। मानसिक प्रताड़ना के लिए हर्जाना भी भरे।
फुरलक गांव निवासी शिकायतकर्ता सुनील कुमार ने आयोग को शिकायत दी थी कि उन्होंने स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से एमएससी गणित में प्रवेश लेने के लिए पानीपत निवासी संदीप कुमार से संपर्क किया था। 19 जून, 2023 को शिकायतकर्ता सुनील कुमार ने संदीप कुमार की यूपीआई आईडी पर फीस की 23 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की। प्रवेश के लिए आवश्यक दस्तावेज सौंपे।
इस भुगतान के दो साल बीत जाने के बाद भी संदीप कुमार ने न तो सुनील का दाखिला करवाया और न ही उनके रुपये वापस किए। सुनील ने जब भी रुपये की मांग की तो उसे झूठे आश्वासन देकर गुमराह किया। मामले की सुनवाई के दौरान विपक्षी पार्टी संदीप कुमार आयोग के समक्ष पेश नहीं हुए। इस कारण उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई।
नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगाया
आयोग ने शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों, जिनमें पेमेंट रसीद, बैंक स्टेटमेंट और व्हाट्सएप चैट शामिल हैं, के आधार पर माना कि विपक्षी पार्टी ने सेवा में कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार किया है। आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने आदेश जारी किया कि संदीप को 23 हजार रुपये (जमा करने की तारीख से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ) देनी होगी। इसके अलावा मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न और कानूनी खर्च के लिए 10 हजार रुपये मुआवजा देना हेगा। इसका भुगतान आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर करना होगा।