संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जुंडला गेट के श्री बांके बिहारी मंदिर में चल रही श्रीमद्ध भागवत कथा में आचार्य आशीष सागर महाराज ने, सारे जग को रही सता ये माया जादूगर की, ये माया जादूगर की... भजन गाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि कथा में भगवान भक्त के भाव देखते हैं न कि सुंदर फूल और पैसा चढ़ाने से प्रसन्न होते वो आपके भाव से प्रसन्न होते हैं।
उन्होंने कहा कि जब कथा में बैठकर ध्यान न लगे तो सभी को जय जय राधा रमण हरि बोल जपने से भाव आ जाता है और तभी कथा श्रवण होती है। ये संसार केवल दिखावा है केवल प्रभु के प्रति ही भाव होना चाहिए।
मनुष्य एक दिन में 21600 सांस लेता है, इसलिए हर सांस से राधे-राधे निकलना चाहिए। वो कान बेकार है जिसने हरि की कथा न सुनी हो। आचार्य ने कहा कि कथा हमेशा व्यास के सामने बैठकर सुननी चाहिए, उनके पीछे बैठकर नहीं, इससे पाप लगता है।
कथा के बीच में कभी भी उठकर नहीं जाना चाहिए। कथा में आने के बाद किभी सोना नहीं चाहिए। आपने देखा होगा कि कथा में कथा व्यास की चौकी सबसे ऊंची लगाई जाती है तो वो चौकीदार होता है, और कथा सुनने वाले को जमीन पर बिठाया जाता है। अब ऊपर बैठा हुआ चौकीदार कथा में ध्यान से देखता है कि कोई सो तो नहीं रहा। उन्हें उठाने की ड्यूटी चौकीदार की है। उन्होंने कहा कि जो लोग धनतेरस के दिन बर्तन खरीदते हैं, उन्हें इस दिन का असली मतलब नहीं मालूम। इस दिन भगवान धनवंतरी का दिन होता है।
इस दिन सभी को औषधि खरीदनी चाहिए, जैसे हल्दी, मोटी इलायची, लाल मिर्च और अन्य रसोई से जुड़ी वस्तु। आशीष महाराज ने कहा कि भगवान के 24 अवतार हुए हैं।
उन्होंने भगवान के श्री सनकादि मुनि, मत्स्यावतार, नारद मुनि, नर-नारायण, कपिल मुनि, दत्तात्रेय, कूर्म (कछुआ), धनवंतरि, मोहिनी आदि सभी 24 अवतारों के नाम भी बताए। उन्होंने कहा कि कलयुग का श्रीहरि का अंतिम अवतार श्री कल्कि के रूप में होगा।