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Karnal News: स्कूल चला गया होता तो बच जाती आरव की जान

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स्कूल चला गया होता तो बच जाती आरव की जान
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- पिता के साथ दुकान जाने की जिद पर नहीं गया था स्कूल
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- इकलौते बेटे की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को नौ वर्षीय आरव का स्कूल था, लेकिन वह पिता के साथ गांव भैणी स्थित दुकान जाने की जिद कर बैठा। पिता भी बेटे के दुलार में उसकी बात मान गए। उसे अपने साथ लेकर दुकान पर आ गए। उन्हें क्या पता था कि बेटे के साथ घर नहीं लौटेंगे। अगर आरव स्कूल चला जाता तो आज अपने परिवार के साथ होता। उसकी जान नहीं जाती, लेकिन काल को कुछ और ही मंजूर था। दो नाबालिगों ने ट्रैक्टर से आरव को कुचल दिया और उसकी मौत हो गई।
पिता सुनील ने बताया कि सोमवार सुबह आरव को स्कूल जाने के लिए तैयार किया जाने लगा तो वह जिद करके बैठ गया कि नहीं जाएगा। कह रहा था कि गांव भैणी स्थित पिता की दुकान पर जाएगा। पिता सुनील बेटे को दुकान पर ले आए। दुकान से कुछ दूरी पर ही छबील लगाई गई थी। बेटा भी वहां चला गया। छबील में बर्तन साफ कर रहे बुजुर्ग के साथ बैठ गया और इसी दौरान तेज गति से ट्रैक्टर चलाते आए दो नाबालिगों ने छबील की मेज को टक्कर मारी फिर पहिया आरव के ऊपर चढ़ गया और वह उन्हें छोड़कर हमेशा के लिए चला गया।
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- 20 जून को था आरव का जन्मदिन
परिवार में माता पिता और दो बड़ी बहनों का चहेता था आरव। दिनभर बहनों के साथ आरव हंसता खेलता था। परिवार के लिए जून खुशी का महीना था। आने वाली 10 जून को जहां बहन का जन्मदिन था, वहीं 20 जून को आरव की भी वर्षगांठ थी। अपने जन्मदिन से 23 दिन पहले आरव परिवार को रोता-बिलखता छोड़ गया। पिता सुनील ने बताया कि आरव की उम्र नौ साल थी और 20 जून को वह 10 साल का हो जाता। गांव के निजी स्कूल में कक्षा-दो में पढ़ता था। पढ़ाई में वह काफी होशियार था।
भाई की मौत की खबर सुन बेहोश होकर गिरी बहनें
आरव की दो बहन उसे सबसे ज्यादा प्यार करती थीं। जब दोनों बहनों को आरव की मौत का पता चला तो वह बेहोश होकर गिर पड़ीं।
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