करनाल। प्रदेश सरकार जहां विद्यार्थियों और शिक्षकों को टैबलेट देकर शिक्षा को डिजिटल प्लेटफार्म पर मजबूत करने का प्रयास कर रही है। वहीं कई ग्रामीण स्कूलों में हालात ऐसे हैं कि यहां पर शिक्षकों द्वारा पर्याप्त समय तक टैबलेट इस्तेमाल करना तो दूर वे अपने सभी शिष्यों के नाम तक भी नहीं बता पाए। मौका था शिक्षा दीक्षा पर्यवेक्षण का।
जिसके तहत जिले के सभी 484 प्राथमिक विद्यालयों में एक साथ टीम ने विजिट किया। इन स्कूलों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर को जांचने के लिए शिक्षा-दीक्षा पर्यवेक्षण के तहत ये टीमें स्कूल में प्रार्थना सभा से लेकर छुट्टी के समय तक रही। स्कूल के द्वार से लेकर मिड डे मील और गतिविधियों समेत 30 से अधिक बिंदुओं पर जांच की गई। इसकी रिपोर्ट भी ऑनलाइन निदेशालय को भेजी गई।
पर्यवेक्षण के दौरान सामने आया कि कई स्कूलों में प्रिंसिपल और शिक्षक के बीच संबंधों में मिठास नहीं है। इसके अलावा कई जगह स्टाफ की बैठकें भी नियमित नहीं होती। कई जगह तो महीने में एक या दो माह में एक बार बैठक हुई है। इसके अलावा पीटीएम में भी अभिभावकों को पूरी रिपोर्ट नहीं दी गई। पर्यवेक्षण टीम ने जब शिक्षकों से कक्षा कक्ष में विद्यार्थियों के नाम पूछे तो कई जगह शिक्षक विचलित भी हो गए। ऐसा ज्यादातर स्कूल में नए आए शिक्षकों के साथ ही देखने को मिला।
विदित हो कि एफएलएन (आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता) के तहत हुए पर्यवेक्षण में जिले के एक खंड की टीम ने दूसरे खंड में जाकर विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर को जांचा। इस दौरान शिक्षा अधिकारी सुदेश ठुकराल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक, समग्र शिक्षा की डीपीसी ज्योत्सना मिश्रा, एफएलएन जिला समन्वयक विपिन कुमार सहित सभी बीईओ, बीआरसी और एबीआरसी भी पर्यवेक्षण में शामिल रहे।
पहले शिक्षा विभाग एक जिले की टीम को दूसरे जिले में भेजकर पर्यवेक्षण करवाता था, लेकिन इस बार समय कम होने के चलते खंड स्तर पर डयूटी लगाई गई है। पर्यवेक्षण के दौरान ऑनलाइन आई रिपोर्ट के आधार पर निदेशालय कार्रवाई करेगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को सम्मानित भी किया जाएगा। - विपिन कुमार, समन्वयक, एफएलएन।
दिनभर के पर्यवेक्षण कार्यक्रम में स्कूलों में प्रार्थना सभा से लेकर अध्यापकों के पढ़ाने के तरीके, एसएमसी सदस्यों के साथ चर्चा, प्रिन्ट रीच कक्षा कक्ष, मिड डे मिल, टीएलएम का प्रयोग बालवाटिका कक्षा प्रबंधन निपुण लक्ष्यों की गहनता से जांच की। रिपोर्ट को टीम ने ऑनलाइन निदेशालय को भेजा है। इसी के आधार पर ही निदेशालय कार्यवाही करेगा। - ज्योत्सना मिश्रा, डीपीसी समग्र शिक्षा।