फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हजारों अवैध कनेक्शनों से हो रही करोड़ों लीटर पानी की चोरी

Tue, 26 Apr 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन
गर्मी तेज पड़ने के साथ लोगों के कंठ भी सूखने लगे हैं। इससे पानी की कीमत का अंदाजा लगाया जा सकता है लेकिन जन स्वास्थ्य विभाग को इसकी कोई परवाह नहीं है। कर्ण नगरी में हजारों अवैध कनेक्शनों से करोड़ों लीटर पानी की चोरी हो रही है, लेकिन इसकी खबर जनस्वास्थ्य विभाग को नहीं है। लोगों ने विभाग की इजाजत के बिना ही पाइप लाइन से कनेक्शन जोड़ लिए हैं। ऐसे उपभोक्ता विभाग को एक रुपये का भी टैक्स नहीं देते। इससे विभाग के राजस्व को करोड़ाें रुपये का नुकसान हो रहा है। लेकिन विभाग के अधिकारियों इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। ऐसे ही कुछ हालात सीवरेज कनेक्शन के भी हैं।
विज्ञापन


इससे बरसाती सीजन में शहर को ओवरफ्लो की समस्या से जूझना पड़ता है। लेकिन विभाग आज तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान निकालने में नाकाम रहा है। ये भी सच है कि ऐसे लोगों की पानी की जरूरत को खारिज नहीं किया जा सकता, लेकिन ये लोग विभाग के गणितीय आंकड़ों को बिगाड़कर ज्यादा बड़ी समस्या पैदा कर रहे हैं। यह गड़बड़ी पानी की जरूरत और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा कर रही है। इससे कनेक्शन धारियों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है।

दरअसल कुछ समय पहले ही सरकार ने प्रदेश के सभी कार्यालयों से इस बारे में रिपोर्ट मांगी थी। जनस्वास्थ्य विभाग के सर्वे के मुताबिक तो शहर में अब पानी के कनेक्शनों की संख्या 35 हजार से बढ़कर करीब 45 हजार तक पहुंच गई है। लेकिन जब नगर निगम ने प्रॉपर्टी सर्वे की रिपोर्ट पेश की तो उसमें हुडा व अवैध कालोनियों के अलावा शहर की नियमित कालोनियों में ही 1.34 लाख प्रॉपर्टी हैं। जिनमें लोग जनस्वास्थ्य विभाग की पाइप लाइन से लिए पानी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में दोनो ही विभागों के सर्वे रिपोर्ट में इतना भारी अंतर देखकर पानी चोरी का अंदाजा लगाया जा सक ता है। हालांकि विभाग द्वारा कुछ समय पहले अभियान चलाकर शहर में पानी कनेक्शन दिए थे। लेकिन विभाग को इस प्रयास में कोई ज्यादा सफलता नहीं मिली है।
विज्ञापन


यह कहने की जरूरत नहीं कि विभाग के अफसरों की लापरवाही उन शहर वासियों को भारी पड़ रही है, जिन्होंने पानी के कनेक्शन लिए हुए हैं। विभाग द्वारा इंतजामात को वैध कनेक्शनों के मुताबिक भी नहीं है। शहर में न तो पर्याप्त ट्यूबवेल हैं, और न ही मजबूत पाइप लाइन। शहर में बरसों पुरानी जर्जर पाइप लाइन से ही करोड़ों लीटर पानी तो सड़कों व नालाें में बह जाता है। लेकिन विभाग द्वारा जलकल की अवधारणा के तहत अभी तक शहर में पानी की बर्बादी पर रोक के पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं।

पानी की बर्बादी भी कम नहीं
विभाग के आंकड़े बताते हैं कि शहर में पानी की आपूर्ति लोगों की जरूरत से भी अधिक हो रही है। लेकिन इसके बाद भी शहर की दर्जनों कॉलोनियों में लोगों के पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है। लेकिन शहर में पानी की बर्बादी भी काफी हो रही है। विभाग की  ज्यादातर पाइप लाइनें काफी पुरानी होने की वजह से जर्जर हो चुकी हैं। अक्सर यह इनमें लीकेज की वजह से कई-कई दिन तक पानी बर्बाद होता रहता है, लेकिन नगर निगम के अफसर ध्यान नहीं देते। सार्वजनिक स्थानों पर लगे स्टैंड पोस्टों का भी यही हाल है। कई स्टैंड पोस्ट ऐसे हैं जहां टोटियां न होने की वजह से हर समय पानी बहता रहता है। पानी की यह बर्बादी रोकने को कोई इंतजाम नहीं किया जाता। जागरूकता की कमी की वजह से पानी की सबसे ज्यादा बर्बादी घरों में होती है। सप्लाई शुरू होती है तो तमाम लोग टंकी को खुला छोड़ देते हैं। इसका खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ता है जो ऊंचाई वाले इलाकों में रहते हैं। वहां तक पानी पहुंच ही नहीं पाता।

विभाग के दावे और आंकड़ों का खेल
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शहर में 45 हजार घरों को कनेक्शन जारी करने को बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं। लेकिन नगर निगम प्रॉपर्टी सर्वे के मुताबिक शहर की नियमित कालोनियों में घरों की संख्या ही 68226 है। वहीं कामर्शियल कनेक्शन की बात करें तो विभाग द्वारा आज तक सिर्फ छह सौ कनेक्शन जारी किए गए हैं। जबकि निगम सर्वे के मुताबिक शहर में कामर्शियल प्रॉपर्टी 13273 है। इसके अलावा निगम क्षेत्र में 849 इंस्टीट्यूशन, 368 उद्योग तथा 51261 रिहायशी व कामर्शियल प्रॉपर्टी हैं। जिले में टोटल प्रॉपर्टीज 133977 हैं, लेकिन विभाग आज तक सिर्फ 45 हजार लोगों को ही पानी के कनेक्शन दे सका हैं।
नोट- हुडा सेक्टर व अनियमित कॉलोनियों के कनेक्शन इससे अलग हैं।

वर्जन
अवैध कनेक्शनों को वैध कराने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। काफी हद तक सफलता भी मिली है। शहर में जब तक सभी कनेक्शन वैध नहीं हो जाते तब तक विभाग द्वारा इस अभियान को जारी रखा जाएगा।
विज्ञापन

-एसपी जोशी, कार्यकारी अभियंता जनस्वास्थ्य विभाग करनाल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें