किसानों की फसल का सत्यापन नहीं हो पाने के कारण ई-खरीद पोर्टल से गेट पास कटने में दिक्कत आ रही है। यही कारण है कि अनाज मंडियों में किसानों की सरसों की फसल की खरीद नहीं हो पा रही है। परिणाम ये है कि किसानों को सरसों की फसल औने-पौने दामों पर निजी व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है। जिससे मंडियों में सरसों की फसल के दाम 800 से 850 रुपये प्रति क्विंटल गिर गए हैं।
किसानों की एमएसपी पर नहीं बिक पा रही
एमएसपी पर सरसों खरीद की प्रक्रिया ये है कि किसानों ने पहले तो सरसों की फसल का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराया। इसके बाद कृषि विभाग के स्तर पर उसका सत्यापन (वेरीफिकेशन) कराया जाता है। सत्यापन के बाद ही उसका डाटा ई-खरीद पोर्टल पर आता है, तभी गेट पास कटता है। जिले के एक मंडी सचिव ने बताया कि पिछले कई दिनों से ई-खरीद पोर्टल से गेटपास नहीं कट पा रहे हैं, जिससे किसानों की सरसों की फसल मंडियों के अंदर एमएसपी पर नहीं बिक पा रही है।
किसान शीघ्रता से सरसों को बेच देना चाहते हैं
दिनभर में सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत किसानों के ही गेटपास कट पा रहे हैं। इधर, खरीद एजेंसी हैफेट के जिला प्रबंधक उधम सिंह ने बताया कि गेटपास कटने तक का मामला तो सरकारी विभागों का है लेकिन गेटपास कटने के बाद जो सरसों मंडी के अंदर आ गई और संबंधिथ किसान का पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर है तो उसका दाना खरीदा जा रहा है। मौसम खराब है, इसलिए किसान शीघ्रता से सरसों को बेच देना चाहते हैं।
अजय कुमार, किसान, आनंद विहार करनाल
बारिश के बाद जैसे-तैसे सरसों को सुखाकर तीन दिन तक मंडियों में लेकर घूमते रहे, लेकिन पोर्टल पर पंजीकरण कराने के बाद भी उन्हें गेटपास नहीं मिला। तब तक सरसों खराब होने की आशंका उत्पन्न हो गई। इस कारण करनाल अनाज मंडी में लाकर आढ़ती को 4600 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर बेची है। जिससे उसे 850 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हुआ है।
सुरेंद्र कुमार, किसान, काछवा
एमएसपी की खरीद पर सिर्फ आठ प्रतिशत नमी पर खरीद की जा रही है, ऊपर से तीन दिनों से गेटपास ही नहीं कट रहे हैं, क्योंकि ई-खरीद पोर्टल पर फसल का सत्यापन ही चढ़ाया नहीं कराया गया है। इस कारण अब करनाल में लाकर सरसों को बेचा है, यहां 4650 रुपये प्रति क्विंटल पर सरसों की बिकी है, उसे 800 रुपये प्रति क्विंटल का सीधा नुकसान उठाना पड़ा है।