दयाल सिंह कॉलेज में एससी-बीसी विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप फंड में फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपी क्लर्क का एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। क्लर्क जितेंद्र चावला पर आरोप है कि उसने छात्रों सेबस पास के पैसे तो लिए, लेकिन ना तो बस पास बनवाकर दिया और ना ही सेशन खत्म होने पर उनके पैसे लौटाए। अब दोनों मामलों में फर्जीवाड़ा सामने आने पर कॉलेज प्रबंधन ने क्लर्क को सस्पेंड कर दिया है। अन्य तरह के कार्य जो इस क्लर्क को सौंपे थे, उनकी भी जांच शुरू कर दी है।
प्रिंसिपल डॉ. चंद्रशेखर भारद्वाज ने बताया कि बस पास के पैसों के गबन का मामला जनवरी 2019 का है। कॉलेज की ओर से क्लर्क जितेंद्र चावला को बस पास बनाने की ड्यूटी लगाई थी। बस से आने वाले विद्यार्थी पास बनवाने के लिए इसी क्लर्क के पास अपनी राशि जमा करवा रहे थे। अभी तक की जांच में अलग-अलग रूट के 50 विद्यार्थियों द्वारा बस पास बनवाने के लिए करीब 24 हजार रुपये की राशि का गबन सामने आया है। अन्य विद्यार्थियों के रिकॉर्ड भी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मामले की भी पुलिस को शिकायत दी है, पुलिस ने आरोपी क्लर्क के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
वेरिफिकेशन के बाद पास के पैसे करेंगे रिफंड
जनवरी माह में बनने वाले पास की वैधता जून माह तक की थी। पैसे देने के बाद भी विद्यार्थियों को बस पास नहीं मिला तो अब कॉलेज प्रबंधन ने आरोपी क्लर्क से रिकवरी कर विद्यार्थियों को उनके पैसे रिफंड करने का निर्णय लिया है। इसके लिए कॉलेज में नोटिस लगाने के अतिरिक्त संबंधित विद्यार्थियों को एसएमएस के जरिए भी सूचित किया जा रहा है। सभी विद्यार्थियों की वेरिफिकेशन के बाद उन्हें पास के पैसे लौटाए जाएंगे।
2015 से फंड ट्रांसफर कर रहा था क्लर्क
स्कॉलरशिप में फर्जीवाड़ा मामले में प्रिंसिपल डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि आरोपी क्लर्क वर्ष 2015 से एससी/बीसी विद्यार्थियों के स्कॉलरशिप का पैसा अपने दोस्तों के खाते में ट्रांसफर कर रहा था। इस बार भी ऐसा ही हुआ। विद्यार्थियों से शिकायत मिलने के बाद जांच कराई तो मामले का खुलासा हुआ। क्लर्क मई 2013 से कॉलेज में कार्यरत है।
छह से 12 हजार रुपये प्रति विद्यार्थी दी जाती है स्कॉलरशिप
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा एससी-बीसी विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप दी जाती है ताकि वे उच्च शिक्षा ग्रहण कर सके। विभाग की तरफ से विद्यार्थियों को साल में एक बार स्कॉलरशिप दी जाती है। विद्यार्थियों की योग्यता के आधार पर छह हजार से 12 हजार रुपये तक की स्कॉलरशिप दी जाती है।
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यह है पूरा मामला
दयाल सिंह कॉलेज के क्लर्क जितेंद्र चावला पर आरोप है कि उसने सरकार की तरफ से एससी-बीसी विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति के 5.95 लाख रुपये विद्यार्थियों को न देकर किसी सुनील, अमित, सागर, दीपांशु और अन्य के बैंक खाते में गैरकानूनी रूप से ट्रांसफर किया है। इसकी जानकारी भी प्रिंसिपल को तब हुई, जब विद्यार्थियों ने उन्हें स्कॉलरशिप न मिलने की जानकारी दी तो उन्होंने सीए से खातों का ऑडिट कराया तो इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। प्रिंसिपल डॉ. चंद्रशेखर के अनुसार, एसबीआई के बैंक खाता नंबर 55002451817 में स्कॉलरशिप का फंड था। जहां से गैरकानूनी रूप से आरोपी ने दूसरों के खाते में ट्रांसफर किया है। इसके अलावा बस पास के पैसों में फर्जीवाड़ा समेत दोनों मामलों की प्रिंसिपल डॉ. चंद्रशेखर ने पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने आरोपी व इसमें शामिल उसके साथियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
1949 से चल रहा है दयाल सिंह कॉलेज
नैक से ए ग्रेड प्राप्त दयाल सिंह कॉलेज की अपनी ही एक अलग पहचान है। आजादी के बाद से वर्ष 1949 से संचालित इस कॉलेज में आर्ट्स, कॉमर्स, साइंस और मेडिकल संकाय में 13 कोर्स चल रहे है। सभी कोर्सों में तीन हजार से ज्यादा विद्यार्थी यहां हर साल पढ़ाई करते हैं।