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राइस मिलों से पुलिस हटाई, चेकिंग शुरू

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हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन की चेतावनी के बाद प्रदेश सरकार की ओर से मिलों के बाहर तैनात की गई पुलिस को हटा लिया गया है। हालांकि, तुरंत प्रभाव से मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन शुरू कर दी है। शुक्रवार को करनाल जिले में कई मिलों की चेकिंग हुई। इससे पहले जिले भर में स्थित 316 राइस मिलों की जांच के लिए 30 कमेटियों का गठन किया गया है। इस कमेटियों में अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है।
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बता दें कि ये कमेटी 26 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट प्रशासन को देंगी। इसके बाद 27 को ये रिपोर्ट प्रदेश सरकार के पास जाएगी। जिन मिलों में गड़बड़ी पाई गई, उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। हालांकि, फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान भी कई मिलर्स में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
बता दें कि शिकायतों के बाद प्रदेश सरकार की ओर से राइस मिलों के बाहर पुलिस का पहरा लगा दिया था। सरकार के पास शिकायत पहुंची थी कि मिलर्स फर्जीवाड़ा कर रहे हैं और यूपी और बिहार से सस्ता चावल लाकर सरकार को दे रहे हैं। इसके साथ ही मंडियों में फर्जी तरीके से गेट पास काटे गए हैं और गलत तरीके से एंट्री की गई है। सरकार ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पांच दिन पहले राइस मिलों के बाहर पुलिस तैनात कर दी थी।
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हालांकि, इसको लेकर मिलों के मालिकों ने काफी विरोध जताया था। वीरवार को हरियाणा राइस मिलर्स एसो. की कुरुक्षेत्र में प्रदेशस्तरीय बैठक हुई थी। इसमें फैसला लिया गया था कि अगर सरकार ने दो दिनों में पुलिस को मिलों के बाहर से नहीं हटाया तो वे मिलों को ताला जड़ देंगे। इसके साथ ही दो दिन तक कोई भी चावल की डिलीवरी देने से इंकार कर दिया था। शुक्रवार को इसका असर दिखा। मिलर्स ने चावल की गाड़ियां एफसीआई को नहीं दी। ऐसे में प्रदेश सरकार की ओर से संभावित आंदोलन को देखते हुए मिलों के बाहर से पुलिस हटा ली। इससे मिलर्स ने राहत महसूस की है, क्योंकि मिलर्स की पहली मांग थी कि पुलिस का पहरा हटाया जाए।
26 तक देनी है जांच रिपोर्ट, नप सकते हैं कई मिलर्स
डीसी विनय प्रताप सिंह के आदेशानुसार जिले में 316 राइस मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए 30 कमेटियां गठित की हैं। एक-एक कमेटी में डीएफएससी समेत अन्य विभागों के अधिकारियों को भी शामिल किया गया हैै। ये टीमें 26 नवंबर तक सभी मिलों की जांच करके डीसी को रिपोर्ट देंगी। आशंका जाहिर की जा रही है कि इस जांच जिले के कई मिलर्स फंस सकते हैं।
निष्पक्षता से की जा रही जांच : डीएफएससी
इस बारे में डीएफएससी अनिल कुमार ने बताया कि राइस मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए 30 कमेटियां बनाई गईं हैं। शुक्रवार से टीमों ने जांच शुरू कर दी है। 26 नवंबर तक सभी मिलों की जांच के बाद रिपोर्ट प्रशासन को दी जानी है। जांच पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से की की जा रही है।
जांच में करेंगे सहयोग : गोयल
इस बारे में हरियाणा राइस मिलर्स एसो. के उप प्रधान विनोद गोयल ने कहा कि हमें मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन कराने से कोई दिक्कत नहीं है। मिल के बाहर पुलिस तैनात करना गलत है, हम केवल इसका विरोध कर रहे थे। जांच में सभी मिलर्स सहयोग करेंगे।
राइस मिलर्स से 20 लाख की अवैध वसूली मामला अदालत में
फिजिकल वेरिफिकेशन के नाम पर राइस मिलर्स से 20 लाख रुपये की अवैध वसूली का मामला पिछले साल सामने आया था। वर्ष 2018 में राइस मिलर्स राजेंद्र रहेजा ने एसडीएम को एक ऑडियो रिकार्डिंग सौंपी थी, जिसमें मंडी सुपरवाइजर अरविंद कुमार मिलर्स से फिजिकल वेरिफिकेशन के नाम पर 20 लाख रुपये की मांग कर रहा है। इसके बाद मामले की जांच मार्केटिंग बोर्ड के जोनल प्रशासक डॉ. सुशील कुमार को सौंपी गई थी, लेकिन मामला सीएम तक पहुंचने के कारण 20 जनवरी को मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक मनदीप सिंह बराड़ करनाल आए थे और राइस मिलर्स से मीटिंग करने के बाद पांचों आरोपियों अधिकारियों को सस्पेंड कर उनके खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिये थे। अगले दिन 21 जनवरी को राजेंद्र रहेजा की शिकायत पर एमडीओ सुनील शर्मा, डीएमईओ सौरभ चौधरी पंचकूला, मार्केट कमेटी की सचिव आशा देवी, मंडी सुपरवाइजर अरविंद कुमार और सतबीर सिंह के खिलाफ सिटी थाने में शिकायत दी। इसी आधार पर सिटी थाना पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। हालांकि, इसकी जांच के लिए एसआईटी भी बनी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। आज ये मामला अदालत में विचाराधीन है, लेकिन विभाग की ओर से सभी आरोपियों को बहाल किया जा चुका है।
तब डीएफएससी से छीनी थी कंट्रोलर की पावर, अब दोबारा से आए करनाल
नियमों को ताक पर रख कर अपने चहेतों जिनके पास राइस मिल तक नहीं है, को धान सीजन में मिलिंग के लिए पैडी अलॉट करने के मामले में वर्ष 2018 में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग तत्कालीन जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक अनिल कुमार से कंट्रोलर की पावर छीन ली थी। साथ ही उनके स्थान पर उनके ही जूनियर अधिकारी डीएफएसओ कुशल बूरा को डीएफएससी का चार्ज सौंपा गया था। अब संयोग है कि डीएफएससी कुशल बूरा का तबादला कर दिया गया है और उनके स्थान पर दोबारा से अनिल कुमार को डीएफएससी लगाया गया है।
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