- अप्रैल-2020 से मार्च 2024 के ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई अनियमितताएं
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। लेखा परीक्षा निरीक्षण दल ने कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में अप्रैल 2020 से मार्च-2024 तक खरीदी गई मशीनों, दवाओं सहित विभिन्न कार्यों का ऑडिट किया था, जिनमें 32 मामलों में कई खामियां बताई गई हैं। इन अनियमितताओं से करोड़ों रुपये का नुकसान बताया गया है। जिस पर जवाब मांगा गया है। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि लेखा विभाग ने जो आपत्तियां जताई हैं, उनका साक्ष्यों सहित जवाब दिया जाएगा। इसके बाद यदि कोई अनियमितता रहती है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ऑडिट रिपोर्ट में अप्रैल 2020 से मार्च 2024 के बीच कुल व्यय 49493.03 लाख और प्राप्तियां 306.60 लाख रुपये की बताई गई हैं। इसमें कहा गया है कि कार्यालय के लेखों में आंतरिक लेखा परीक्षा की व्यवस्था नहीं है। इसमें पैरा एक में बताया गया कि एयर और वैक्यूम सिस्टम 236 लाख 55 हजार रुपये में खरीदा गया था। जो 11 अक्तूबर 2022 से बंद पड़ा है। इससे पहले भी आठ साल तक इसे बंद रखा गया था, जो 24 मार्च 2022 से शुरू हुआ था।
यह सवाल उठाया गया है कि यदि सिस्टम बंद हैं तो अन्य वैकल्पिक व्यवस्था क्या है। ढाई साल से काम कैसे चल रहा है, यदि इसकी आवश्यकता नहीं थी तो इसे खरीदा क्यों गया। रिपोर्ट में चिल्ड्रंस एजूकेशन अलाउंस में भी 850500 रुपये का अनियमित भुगतान करने की बात लिखी गई है। इसका यहां कोई उचित रजिस्टर तक नहीं बनाया गया था। इसी तरह पैरा तीन में चिकित्सा उपकरणों और स्थापना में देरी के कई मामले लिखे गए हैं। जिसमें आपूर्तिकर्ता एजेंसी यदि समय पर उपकरण नहीं देती है तो उसकी देय राशि में 2.5 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से कटौती का नियम है, लेकिन देरी से आपूर्ति के बावजूद भी कंपनी से कटौती नहीं की गई है, जिससे करीब 25.06 लाख रुपये का कंपनी को अनुचित लाभ दिया गया है। पैरा-चार में एयर कंडीशनर की खरीद को भी अनियमित बताते हुए 11.94 लाख का भुगतान किए जाने की बात कही गई है।
पैरा पांच में भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर परिहार्य व्यय व ठेकेदार को अनुचित लाभ दिया गया है। जिसमें चार साल में 4.30 लाख रुपये का नुकसान बताया गया है। निविदा आवंटन की स्वीकृति में विलंब के कारण ठेकेदार को 4.67 लाख का अतिरिक्त भुगतान करना भी पाया गया है। पैरा-9 में दवाइयों की खरीद भी अनियमित बताई गई है। जिसमें तीन में कोई कुटेशन करनाल से नहीं लिया गया है। पैरा 10 में अनियमित वेतन निर्धारण भी बताया गया। दवाइयों की शार्टेज दिखाई गई है। सरकारी वाहन के निजी उपयोग किए जाने की बात भी अंकित की गई है। एक ही समय में दो दो वाहन उपयोग किए गए हैं। इन 32 बिंदुओं पर कॉलेज प्रबंधन से जवाब मांगा गया है।
कॉलेज का लेखा विभाग आपत्तियों का देगा जवाब : निदेशक
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने बताया कि ये ऑडिट उनसे पहले के निदेशक के कार्यकाल का है। ऑडिट रिपोर्ट में जो आपत्तियां लगाई हैं, उनका जवाब कॉलेज का लेखा विभाग देगा। अक्सर ऐसा होता है कि जब टीम ऑडिट करती है तो कई अभिलेख उस समय मौजूद नही होते तो उस समय तो अनियमितता लगती है लेकिन जब अभिलेख प्रस्तुत किए जाते हैं तो वह दुरुस्त हो जाता है। अभी तो जवाब दिया जाएगा, इसके बाद कोई अनियमितता रह जाती है तो उस पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।