पिहोवा। विदेशी पक्षियों ने उपमंडल पिहोवा के गांव सारसा के तालाब में जमकर स्नान किया। आजकल विदेशी पक्षियों की पंद्रह तरह की प्रजातियां सारसा व आसपास के गांवों में बने तालाबों में देखी जा रही हैं।
इस तरह की प्रजातियां एकांत माहौल की तलाश में साइबेरिया से आई हैं। इस वर्ष उपमंडल पिहोवा की फिजा इन विदेशी मेहमानों को भा गई है।
अहम पहलू यह है कि साइबेरिया से तीन हजार किलोमीटर की यात्रा करके यहां पहुंचने वाले इन पक्षियों को देखकर ग्रामीण भी दंग रह गए हैं। इस सीजन में देरी के साथ इन पक्षियों की तादात में भी इजाफा हुआ है।
गांव सारसा के तालाब पर आजकल रंग बिरंगे विदेशी पक्षियों की चहल कदमी को देखा जा सकता है। इस तालाब में कई पक्षी डुबकी लगाकर मछली व अन्य कीट खाकर अपने भोजन की पूर्ति कर रहे हैं और कई पक्षी तालाब के बीच एक छोटे टापूनूमा जगह पर बैठकर यहां की फिजा का मजा ले रहे हैं।
इन पक्षियों के आने से गांव की महत्ता भी बढ़ गई है। गांव सारसा निवासी महाबीर मलिक का कहना है कि इस साल विदेशों से पक्षियों की संख्या में इजाफा हुआ है। गांव के लोग इन पक्षियों को देखकर अपना मनोरंजन कर रहे हैं।
साइबेरिया से आएं इन पक्षियों के बारे में बताते हुए केयू प्राणी शास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. एएस यादव का कहना है कि हर साल साइबेरिया व अन्य देशों से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी हरियाणा व आसपास के राज्यों में आते हैं।
साइबेरिया में तापमान माइनस 50 डिग्री से कम होने के कारण तथा भोजन की तलाश में भारत के विभिन्न राज्यों से पक्षी पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि ये पक्षी करीब तीन हजार किलोमीटर का सफर तय करने के बाद यहां पहुंचते हैं। यहां पर बतख की सात तरह की प्रजातियां, दो तरह के पन कौआ, तीन तरह के सारस, दो तरह की क्रेनस सहित अन्य तरह की प्रजातियों के पक्षी डेरा डालते हैं।
उन्होंने कहा कि इस मौसम में विदेशी पक्षी तालाबों में भोजन की पूर्ति करते हैं और कई जगहों पर अंडे देकर अपने वंश में भी वृद्धि करते हैं। विदेशी पक्षी हमेशा एकांत माहौल व भोजन वाली जगह की तलाश में रहते हैं।
पहले ब्रह्मसरोवर पर इन पक्षियों की ज्यादा संख्या को देखा जा सकता था, लेकिन लोगों की ज्यादा आवागमन व शोरगुल ज्यादा होने के कारण यहां पर इन की संख्या कम होती जा रही है। इन पक्षियों से आने से गांव की सुंदरता मं चार-चांद लग जाते हैं।