किताबों के नाम पर अभिभावकों से निजी स्कूलों द्वारा हो रही सरेआम लूट के मामले को लेकर शिक्षा विभाग जाग गया है। अमर उजाला द्वारा सिलसिलेवार किताबों को लेकर हुई कमीशनखोरी की रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने जिलेभर के सभी स्कूल प्रिंसिपलों को पत्र भेा हैष। पत्र में साफ कहा गया है कि बिना विभाग की अनुमति के स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकेंगे और स्कूल में केवल एनसीईआरटी की किताबें ही लगाई जाएंगी।
जो इन नियमों का पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बुधवार को जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार गौरिया ने मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लगवाने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही शिक्षा विभाग से अनुमति लेने के बाद ही फीस बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि शिक्षा विभाग के आदेशानुसार फीस बढ़ोतरी की विभाग से अनुमति लेने के बाद ही बढ़ी हुई फीस अभिभावकों से ली जाएगी। वार्षिक फीस कक्षा पहली, छठी, नौंवी व 11वीं कक्षा के अतिरिक्त किसी और कक्षा में नहीं ली जाएगी।
जारी निर्देशों में कहा गया है कि सीबीएसई स्कूलों में शिक्षा विभाग तथा सीबीएसई द्वारा आदेशित एनसीईआरटी की किताबें ही एकमात्र पुस्तकों के रूप में लगाई जाएं। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि स्मार्ट क्लास फीस, कंप्यूटर फीस तथा अतिरिक्त चार्ज नहीं लिए जाएं। इसके अलावा नियम 134-ए के तहत कक्षा एक से आठवीं तक विभागीय नियमों के अनुसार कोई भी फीस नहीं ली जाएगी और कक्षा नौंवी से 12वीं तक नॉमर्ल चार्ज ही लिए जाएं। आदेशों की पालना नहीं करने वाले स्कूलों के
खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।