माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सरकारी धान से चावल की रिकवरी में फंसे राइस मिलर्स पर अब प्रशासन का शिकंजा कसता जा रहा है। संपत्ति कुर्की के अंतिम नोटिस जारी होते ही एक जीआर राइस मिल संचालक ने 2.30 करोड़ रुपये जमा कराकर राहत पाने की कोशिश की है। अब प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सिर्फ मिल संचालक ही नहीं बल्कि गारंटरों पर भी कार्रवाई की तलवार लटकेगी।
लगातार 12 साल यानी विभाग की ओर से वर्ष 2013 से 2025 तक मिलर्स को बार-बार नोटिस जारी किए जाते रहे। नोटिस मिलने के तुंरत बाद हर बार मिल संचालक अदालत का दरवाजा खटखटाते रहे और कार्रवाई को टालते रहे लेकिन इस बार कोर्ट से कोई स्थायी राहत यानी स्टे नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए सीधे कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बता दें कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की जांच में सामने आया है कि जिले के 58 राइस मिलर्स ने सरकार से धान उठाने के बाद तय 67 प्रतिशत चावल वापस नहीं किया। इस पूरे मामले में करीब 520 करोड़ रुपये का बकाया सामने आया है। वर्षों तक चली इस गड़बड़ी के बाद अब सरकार ने इसे गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए सख्त रुख अपना लिया है।
पूरी केस फाइल तैयार
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने सभी डिफॉल्टर मिलर्स की विस्तृत केस फाइल तैयार कर ली है। इसमें बकाया राशि, मिल की संपत्ति, गारंटरों का विवरण और कानूनी स्थिति शामिल है। यह फाइल अब जिला राजस्व अधिकारी को भेज दी गई है, ताकि कुर्की और नीलामी की कार्रवाई तेज की जा सके। अब जिला राजस्व अधिकारी की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
गारंटरों पर भी कसेगा शिकंजा
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर मिल संचालक बकाया राशि जमा नहीं करते हैं, तो उनके साथ-साथ गारंटरों की संपत्तियों को भी कुर्क किया जाएगा। इससे उन लोगों में भी चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने गारंटी देकर मिलर्स का साथ दिया था। एक मिल द्वारा 2.30 करोड़ रुपये जमा कराने के बाद बाकी मिलर्स पर भी दबाव बढ़ गया है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि सख्ती का असर दिखना शुरू हो गया है और आने वाले दिनों में अन्य मिलर्स भी बकाया राशि जमा करने के लिए आगे आ सकते हैं।
वर्जन-
जिन राइस मिलर्स ने बकाया नहीं लौटाया उनसे रिकवरी के लिए पूरी केस फाइल बनाकर डीआरओ को सौंप दी गई है। इनसे वसूली की जाएगी। इसके लिए भले ही सरकार और प्रशासन को इनकी संपत्तियों को नीलाम ही क्यों न करना पड़े। बकाया डिफॉल्टरों के साथ उनके गारंटरों और उनकी पहली फर्म के आधार पर बनाई गई दूसरी फर्माें का भी रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
मुकेश कुमार, नियंत्रक, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।