संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण के प्रति किसानों को जागरूक किया। कृषि विभाग की ओर गांव नौच, कठवाड़, हरसोला और मानस में किसान गोष्ठियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. सतीश कुमार नारा की अध्यक्षता में हुए। खंड कृषि अधिकारी डॉ. जगबीर लांबा ने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए दी जा रही सरकारी सुविधाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि देसी गाय खरीदने पर 30 हजार रुपये और प्राकृतिक खेती में घोल तैयार करने के लिए ड्रम पर तीन हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। किसानों को एग्रीस्टैक आईडी बनवाने के लिए भी प्रेरित किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त के लिए ई-केवाईसी, भूमि सत्यापन को जरूरी बताया। किसानों को मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पर पंजीकरण करवाने की सलाह दी गई। साथ ही बायोगैस संयंत्र के बारे में भी जानकारी दी। फसल विविधीकरण के तहत किसानों को धान के स्थान पर कम पानी वाली फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, पोषक अनाज और कपास जैसी फसलों को बढ़ावा देने की जानकारी दी गई।
किसानों को बताई जीवामृत तैयार करने की विधि
एटीएम सतबीर सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि 10 किलोग्राम देसी गाय का गोबर, पांच लीटर गोमूत्र, 2.5 किलोग्राम गुड़, एक किलोग्राम बेसन और 500 ग्राम मिट्टी को 180 से 200 लीटर पानी में मिलाकर जीवामृत तैयार किया जाता है। घोल को छाया में 10 दिन रखने के दौरान सुबह-शाम लकड़ी की डंडे से घड़ी की दिशा में हिलाया जाता है। 10 दिन बाद करीब 200 लीटर जीवामृत एक एकड़ खेत के लिए तैयार हो जाता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को रासायनिक मुक्त और प्रकृति के नियमों पर आधारित कृषि पद्धति बताया। किसानों को मृदा स्वास्थ्य, फसल पोषण और पर्यावरण संरक्षण के उपायों की भी जानकारी दी गई। इस अवसर पर बीटीएम राजबीर सिंह, एटीएम अनूप माथुर, विनय कुमार, मंदीप, कृषि पर्यवेक्षक संदीप कुमार, धर्मबीर सिंह मौजूद रहे।