भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रतन मान ने कहा कि बैंक ऋण वसूली के एवज में किसानों की कृषि भूमि कुर्क करने से बाज आए। किसान समुदाय बैंकों के इन तुगलकी फैसलों को किसी भी सूरत में सहन नहीं करेगा।
बैंक ऐसे कदम नहीं उठाए व समझौता नीति के तहत ऋण वसूली करे। भाकियू के शिष्टमंडल ने असंध एसडीएम से भेंट कर इस मामले से अवगत कराया था। जैसे ही तहसीलदार चोचड़ा के पावर हाउस में बोली प्रक्रिया पूरी करने के लिए बैंक अधिकारियों के साथ पहुंचे तो मौके पर भाकियू कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया।
इसी बीच सरकारी अमले ने मौके की नजाकत को समझते हुए निकलना ही बेहतर समझा। किसान नेता मान शुक्रवार को गांव चोचड़ा में एक किसान की जमीन कुर्क करने के विरोध में भाकियू के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे थे। भाकियू नेताओं व सदस्यों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
उन्हाेंने कहा कि सरकार यदि फसलों के उचित मूल्य दे तो किसान स्वत: ही ऋणमुक्त हो जाएगा। सहकारी बैंक किसानों से दोगुना से अधिक ऋण वसूली नहीं कर सकते लेकिन राष्ट्रीयकृत बैंक मनमानी वसूली करते हैं। इसका यूनियन विरोध करती रहेगी। पंजाब, हरियाणा व बिहार में ही केवल किसानों को जमीन के मालिकाना हक मिले हुए हैं और सरकार किसान विरोधी नीति अपनाकर किसानों को उजाड़ने का काम कर रही है।
किसानों ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए जमकर नारेबाजी कर फैसला लिया गया कि सभी किसान एकजुट होकर किसानों की भूमि की कुर्की नहीं होने देंगे। चाहे किसी प्रकार की कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। पंचायत को संबोधित करते हुए भाकियू नेता रतनमान ने कहा कि बढ़ती महंगाई व फसलों के लाभकारी दाम नहीं मिलने की वजह से किसान घाटे की खेती करने को मजबूर है।
इसके चलते किसानों की हालत बदतर होती जा रही है और आत्महत्या करने पर हैं। ऐसे में सरकार द्वारा भूमि को नीलाम करने का आदेश जारी करना दुर्भाग्यपूर्ण है। मान ने किसानों को लामबंद होने का आह्वान करते हुए कहा कि अब किसानों को मजबूत होकर आंदोलन करने के लिए तैयार होना होगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि भाकियू के रहते किसानों की जमीन की कुर्की किसी भी सूरत में नहीं होने दी जाएगी। इस अवसर पर भाकियू के रोहतक मंडल प्रभारी प्रेम सिंह शाहपुर, खंड प्रधान जोगेंद्र झींडा, रामदिया चोचड़ा, परमाल सिंह घरौंडा, धनेतर सिंह राणा, बाबा लाभ सिंह, अमरीक सिंह थल, श्याम सिंह मान, किसान नेता महताब कादियान, चांदवीर सोहना, शैलेंद्र, रामपाल व ईश्वर चोचड़ा, मजदूर नेता सतबीर जाणी सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
किसान ने जताया कड़ा विरोध
किसान की जमीन की नीलामी करने पहुंचा प्रशासनिक अमला व बैंक अधिकारियों को बोलीदाता नहीं मिलने के कारण व भाकियू नेताओं के विरोध के कारण बैरंग ही लौटना पड़ा। वर्ष 2003 में गांव चोचड़ा के एक किसान ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया करनाल की शाखा से ट्रैक्टर खरीदने के लिए चार लाख का ऋण लिया था।
बैंक ने इसके बदले पांच एकड़ जमीन रहन ले ली थी। अब बैंक ने ऋण पर ब्याज ठोकते हुए बारह लाख रुपये की वसूली का केस अदालत में दायर किया हुआ था। कोर्ट से ऋण वसूली के लिए जमीन कुर्क करने के आदेश बैंक ने प्राप्त कर लिए थे और नीलामी की तिथि 13 सितंबर रखी गई थी। नीलामी का स्थान किसान के धान की फसल से लहलाते खेतों में ही रखा गया था।
मौके पर तहसीलदार जगदीशचंद्र, बैंक प्रबंधक प्रवेश कुमार व पुलिस अधिकारी पहुंचे। प्रतीक्षा करने पर भी कोई बोलीदाता नहीं पहुंचा, दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रतन मान के नेतृत्व में सरकार व बैंक के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए नीलामी का विरोध किया। इसके चलते प्रशासनिक अमले को बिना नीलामी किए खाली हाथ लौटना पड़ा।