भारतीय किसान यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष रतनमान ने कहा है कि पिछले 70 सालों से राजनैतिक दल किसानों का इस्तेमाल वोट बैंक की तरह करते रहे है। लेकिन अभी तक किसानों को किसी भी राजनैतिक दल ने गले नहीं लगाया है। हर किसी ने किसानों का शोषण ही किया है। जिसकी वजह से किसान कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। हर सरकार बजट में किसानों के लिए कर्ज की तो लुभावनी घोषणा तो करती है लेकिन किसानों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाने के लिए कोई भी सरकार योजना नहीं बनाती। इन नीतियों के चलते किसान और मजदूर को आर्थिक आजादी नहीं मिल पाई है।
तीन मार्च को किसानों की दहाड़ महापंचायत में आर्थिक आजादी के लिए उद्घोष किया जाएगा। वह घरौंडा के किसान नेता कुलदीप संधु के निवास पर किसान पंचायत को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों को किसान पटका भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर जिला संरक्षक मेहताब सिंह कादियान, जिला प्रवक्ता सुरेंद्र सांगवान, खंड प्रधान विनोद राणा, किसान नेता कुलदीप संधु, जिला सलाहकार धनेतर राणा, कोषाध्यक्ष कुलविन्द्र सिंह, किसान नेता डॉ. सत्यवीर तोमर सहित कई किसान नेताओं ने संबोधित किया।
इस अवसर पर किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने पिछले 10 महीनों में उद्योगपतियों के कई हजार करोड़ के कर्ज माफ किए। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों को उद्योग लगाने के लिए रियायती दरों पर जमीन, टैक्स फ्री पूंजी सहित तमाम रियायतें देते है, लेकिन किसानों को किसी तरह की रियायत नहीं मिलती। प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने कहा कि सरकार अनाज का आयात कर किसानों को आत्महत्या की तरफ ले जा रही है। इससे किसानों की बदहाली और बढ़ेगी। किसान दहाड़ महापंचायत का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पंचायत में राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टकैत समेत उत्तर भारत के कई राज्यों के अध्यक्ष आएंगे।
इस अवसर पर किसान नेता कुलदीप संधु, जसमेर रसीन, वीरेंद्र सिंह राणा अराईपुरा, सतबीर सिंह ढिंगरमाजरा, संदीप राणा घरौंडा, देव पान्नू फुरलक, सुरेंद्र बैनीवाल मलिकपुर, रामनिवास कौशिक शाहजहानुपर, बाजिद अली बल्हेड़ा, सतेंद्र गगसीना, कर्मबीर पानू फुरलक, जयपाल सिंह सैनी, भाग सिंह मलिकपुर, रामसिंह कैमला, सोहन लाल हरिसिंहपुरा, सुनील राणा कालरम, चरणजीत सिंह घरौंडा, संदीप सिंह स्टौंडी, मांगे राम ढिंगरमाजरा, ईश्वर कश्यप गगसीना, ज्ञान सिंह अराईपुरा, जगविन्द्र रायपुर जाटान, जोगेंद्र सिंह बसताड़ा, गुरनाम सिंह रायपुर जाटान समेत सैकड़ों किसान मौजूद थे।