करनाल। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में देश की खाद्यान्न पैदावार को बढ़ाने के लिए किसानों को इसके खतरों से आगाह करना बेहद आवश्यक है।
इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने किसानों को प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल में दो करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक किसान प्रशिक्षण हॉल का निर्माण बनाया जाएगा। जिसका प्राथमिक कार्य शुरू कर दिया गया है।
जलवायु परिवर्तन का सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ता है। कभी अधिक गर्मी, सर्दी या बारिश है तो कभी सूखा, इससे कहीं न कहीं फसलों की पैदावार प्रभावित होती है।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल आदि देश के कई ऐसे संस्थान हैं, जो अलग-अलग फसलों में जलवायु सहनशील फसलों की किस्मों को तैयार करने में जुटे हैं। इस बार जो आंकड़े आए हैं, वह आशान्वित करने वाले हैं कि देश में किसानों ने गेहूं के अधिकतर रकबे में जलवायु सहनशील किस्मों के बीज ही बोए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अनुसंधान संस्थानों में जो नई किस्में और तकनीकियां तैयार होती हैं, उनके किसानों तक पहुंचने में काफी देर हो जाती है। खासकर जो नई किस्मों के बीज तैयार होते हैं, उन्हें भी सभी किसानों तक पहुंचने में लंबा समय लग जाता है।
इसी तरह से पराली न जलाने से होने वाले फायदे, लवणीय भूमि में खेती की तकनीकियां, किस क्षेत्र में कौन सी किस्मों के बीज बोने हैं, नए अनुसंधान किसानों तक देरी से पहुंच पाते हैं लेकिन सीधे अनुसंधान संस्थानों में ही किसानों को वैज्ञानिकों की ओर से प्रशिक्षण दिया जाए तो ये कार्य शीघ्रता से हो सकता है और किसान अधिक लाभान्वित हो सकते हैं। पैदावार भी बढ़ेगी।
इसी को देखते हुए आईआईडब्ल्यूबीआर में किसान प्रशिक्षण हाल का निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। इसकी निर्माण लागत करीब दो करोड़ रुपये है, जिसके इसी साल तैयार हो जाने की संभावना है। इसमें 250 सीटें तय की गई हैं।
यहां देश के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के साथ-साथ कई अन्य तरह के भी प्रशिक्षण दिए जाएंगे।